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कुल्लू। जिला कुल्लू में राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा लागू किए जा रहे मैदानी इलाकों के नियमों को लेकर लोगों में रोष है। राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ लगती जमीन पर किसी तरह का निर्माण करना कठिन हो गया एनएचएआई के मापदंड को पहाड़ी राज्य में पूरा करना लोगों की गले की फांस बन गया है। मैदानी इलाकों पंजाब, हरियाणा व दिल्ली के नियम पहाड़ी इलाकों में इसका अनुपालन करना असंभव है। गौर रहे कि एनएचएआई फोरलेन और नेशनल हाई-वे चौड़ीकरण के लिए वही मापदंड अपनाए जा रहे हैं, जो दिल्ली, पंजाब या हरियाणा जैसे समतल क्षेत्रों में लागू होते हैं, लेकिन पहाड़ में लोगों के पास सडक़ किनारे वैसे ही 2-3 बिस्वा से लेकर एक बीघा तक जमीन होती है।

ऐसे में निर्माण के लिए एनओसी लेने के लिए दोनों तरफ सर्विस लिंक सडक़ निकालना कठिन है और अन्य लोगों की जमीनें आने से इस नियम का पालन किसी भी सूरत में नहीं हो सकता। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे घर, दुकान या कोई भी निर्माण करने के लिए अब एनएचएआई से ऐक्सेस परमिशन यानी एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए लोग ऑनलाइन पोर्टल आवेदन के लिए उपलब्ध है, लेकिन फीस सुनकर आम आदमी के होश उड़ रहे हैं। एनओसी की फीस करीब तीन लाख के करीब है मुख्य सडक़ कुछ भी नुकसान पहुंचता है, तो इसकी भरपाई भी आवेदक को ही करनी पड़ेगी। एनएच पर एनओसी के लिए 75 मीटर लेफ्ट, 75 मीटर राइट का नियम ने लोगों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। दोनों तरफ सर्विस रोड दिखाना अनिवार्य है। पहाड़ में इस नियम पर केंद्र को विचार करने की आवश्यकता है। यह नया हिमाचल के लोगों के लिए एक भद्दे मजाक के समान है।

कितनी है सरकारी फीस

घर और छोटी दुकानों के लिए 2.5 लाख रुपए की बैंक गारंटी देनी होती है। यह पैसा काम पूरा होने के बाद रिफंड हो जाता है। कॉमर्शियल बिल्डिंग, होटल, पेट्रोल पंप, शोरूम के लिए 2.80 लाख रुपए जमा करने होते हैं। इसमें से दस हजार रुपए आवेदन फीस सहित अन्य खर्चे भी शामिल है।

पहाड़ में कहां से आए 150 मीटर जमीन

लोगों का कहना है कि यह नियम पूरी तरह से मैदानी इलाकों को देखकर बनाया गया है कुल्लू-मनाली जैसे पहाड़ी जिलों में एक तरफ खड़ी चट्टान और दूसरी तरफ गहरी खाई है। किसी गरीब आदमी के पास कुल दो से पांच बिस्वा जमीन होती है, उसमें 150 मीटर (75 प्लस 75) का लिंक रोड कहां से दिखाएगा। कई जगहों पर तो एनएच की चौड़ाई ही दस मीटर है, वहां 150 मीटर का सर्विस रोड बनाना भौगोलिक रूप से असंभव है।

लोगों के काम रुके, पास नहीं हो रहे नक्शे

एनएच किनारे लोगों के मकानों के नक्शे पास नहीं हो रहे हैं। बैंक लोन के लिए एनओसी नहीं मिल रही। पुरानी दुकानों की मरम्मत तक नहीं कर पा रहे हैं। पटवारी और तहसील से लेकर एनएचएआई दफ्तर चक्कर काटने को लोग मजबूर हैं।

जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज

जिला परिषद सदस्य अनिल राणा और ग्राहण पंचायत प्रधान नोतम सिंह, पुईद पंचायत के प्रधान गोविंद राम ने कहा कि पहाड़ के लिए अलग नियम होने चाहिए। मैदान में जहां सैकड़ों एकड़ जमीन है वहां 75 मीटर संभव है, लेकिन पहाड़ में पांच मीटर का लिंक रोड निकालना भी बड़ी बात है। लोगों ने केंद्र सरकार और एनएचएआई से मांग की है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए इस एनओसी नियम में तुरंत छूट दी जाए 75 मीटर के नियम को हटाया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके। इस बारे में केंद्रीय सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को भी अवगत करवाया जाएगा।

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