नागपुर। आएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिश हो रही है। दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उनका मकसद सत्ता परिवर्तन कर हालात सुधारना नहीं, बल्कि अपने पिट्ठू बैठाना है। देश के कुछ नेता देश तोडऩे में ऐसे लोगों की मदद कर रहे हैं। भागवत मंगलवार को नागपुर संघ मुख्यालय में आयोजित विजयादशमी उत्सव में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत और हिंदू समाज को तोडऩा चाहते हैं और उन्हें ऐसे नेताओं का भी समर्थन मिलता है। आरएसएस हर साल विजयादशमी पर अपना स्थापना दिवस मनाता है। 1925 में इसी दिन संघ की स्थापना हुई थी। भागवत ने कार्यक्रम में शस्त्र पूजन किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि समस्याओं के कारण आंदोलन होते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समाधान होना चाहिए, न कि समाज में द्वेष और विभाजन पैदा करना। कई बार आंदोलनों को दूसरे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है और वे राजनीति का साधन बन जाते हैं। समाज और देश को सिर्फ नेता नहीं चलाते, बल्कि समाज की सक्रियता से भी समस्याओं का समाधान होता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उनके प्रभाव में आकर हमें उत्तेजित नहीं होना चाहिए। लॉर्ड कर्जन ने हिंदू-मुस्लिम आधार पर बंगाल का विभाजन किया था, जिसे चार साल बाद वापस लेना पड़ा। लेकिन 1947 में देश का विभाजन नहीं रुक सका, क्योंकि लोगों के मन में आ गया था कि जो अलग दिखते हैं, वे अलग ही हैं। हम सभी के पूर्वज एक हैं और हमारी संस्कृति का मूल भी एक है। किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। भारत की परंपरा और विचारों में दुनिया की समस्याओं का समाधान देने की क्षमता है।
