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शिमला। चंबा से कांगड़ा की दूरियों को कम करने का 70 के दशक में देखा सपना मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पूरा करेगा। दो जिलों की लाखों की आबादी को पूरी उम्मीद है कि सीएम होली दौरे के दौरान इस निर्माण को लेकर बड़ी घोषणा करेंगे। हालांकि प्रदेश की सियासत में दशकों से यह मुद्दा सुर्खियों में रहा है और टनल निर्माण के वादों के बीच लगातार उलझता रहा है। इसी के चलते दोनों जिलों के लोगों की भी यहीं मांग है कि जल्द दोनों जिले सडक़ के जरिए आपस में जुड़े। जानकारी के अनुसार 70 के दशक में कांग्रेसी विधायक पंडित श्रीराम ने होली-उतराला सडक़ का सपना संजोया था और इसकी शुरुआत हुई थी। उस दौरान इस सडक़ को कांगड़ा जिला के एहजू तक बनाने की योजना थी, जिसके बाद खडामुख से होली और फिर न्याग्रंा के लाके वाली माता मंदिर तक इस सडक़ का निर्माण टुकड़ों में हुआ, लेकिन लंबे समय से सडक़ के अगले तीन किमी हिस्से को पूरी तरह से तैयार करने में भी लंबा वक्त लग गया। बहरहाल अब लाके वाली माता मंदिर से आगे तीन किलोमीटर तक सडक़ निर्माण हो चुका है।

चंबा और कांगड़ा जिला को आपस में जोडऩे के लिए यह निर्माण इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि होली घाटी के 80 से 90 फीसदी परिवारों के दोनों जगह घर है। ऐसे में लोगों का साल भर दोनों ठिकानों पर आना जाना लगा रहता है। वर्तमान में होली से कांगड़ा जिला के बैजनाथ तक पहुंचने के लिए 12 से 14 घंटों का सफर तय करना पड़ता है और यह दूरी 300 किलोमीटर के करीब है। वहीं होली-उतराला सडक़ का निर्माण पूरा हो जाता है तो यह दूरी घटकर महज 70 किलोमीटर के आसपास रह जाएगी। ऐसे में जनता को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस सडक़ के निर्माण को गति देने और बजट की कमी को दूर करने के लिए अपने दौरे के दौरान बड़ी घोषणा कर सकते है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू 22 अक्टूबर को भरमौर क्षेत्र की होली घाटी के प्रवास पर शिमला से रवाना होंगे। इस दौरान उनका होली में एक जनसभा भी होनी है और दो महत्त्वपूर्ण सडक़ों के चल रहे कार्यो का निरीक्षण भी करना है।

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