शिमला। भौगोलिक और चुनावी लिहाज से भले ही हिमाचल प्रदेश को देश के नक्शे पर एक छोटा राज्य माना जाता हो, लेकिन जब बात राष्ट्रीय राजनीति और कुशल रणनीतिकारों की आती है, तो यह छोटा पहाड़ी राज्य हमेशा अग्रणी पंक्ति में खड़ा नजर आता है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में हिमाचल के नेताओं का लगातार बढ़ता कद इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि पार्टी हाईकमान को हिमाचली विजन पर कितना गहरा भरोसा है। कांगड़ा के छोटे से गांव से निकले पवन राणा, जोगिंद्रनगर के अजय जम्वाल और सिरमौर की विधायक रीना कश्यप को हाल ही में देश के अलग-अलग राज्यों में सौंपी गई अहम जिम्मेदारियां इस बात की गवाह हैं कि दिल्ली के सियासी गलियारों में हिमाचल का सिक्का पूरी खनक के साथ चल रहा है।
कांगड़ा जिला के ज्वालाजी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छोटे से गांव लगडू के निवासी पवन राणा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी संगठनात्मक क्षमता का लोहा मनवाया है। हिमाचल प्रदेश और देश की राजधानी दिल्ली में महामंत्री संगठन के रूप में अपनी सफल पारी खेलने के बाद, अब पार्टी ने उन्हें हरियाणा जैसे महत्त्वपूर्ण और सियासी रूप से जटिल राज्य में महामंत्री संगठन की कमान सौंपी है। इसके साथ ही मंडी जिला के जोगिंद्रनगर से ताल्लुक रखने वाले अजय जम्वाल को महाराष्ट्र बीजेपी का संगठन महामंत्री बनाया गया है, जो अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण पद है। इसके साथ ही सिरमौर जिला के पछाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक रीना कश्यप को भी पार्टी ने एक बड़ा मुकाम देते हुए जम्मू-कश्मीर में सह-प्रभारी का जिम्मा सौंपा है।
प्रदेश के नेताओं ने साबित की काबिलियत
देश की राजनीति में हिमाचल का यह आकलन एक स्पष्ट संदेश देता है। अक्सर बड़े राज्यों के विधायकों और सांसदों के भारी संख्या बल के आगे छोटे राज्यों की राजनीतिक अहमियत को कम आंक लिया जाता है, लेकिन हिमाचल ने इस मिथक को पूरी तरह से तोड़ा है। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के रूप में देश को पहले ही सर्वोच्च सांगठनिक नेतृत्व दे चुके इस राज्य ने साबित कर दिया है कि संगठन को मजबूत करने, अनुशासित कैडर तैयार करने और चुनावी बिसात बिछाने में हिमाचली नेताओं का कोई सानी नहीं है।
