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शिमला। प्रदेश सरकार द्वारा कर्ज लेने का सिलसिला जारी है। वित्त विभाग ने कर्ज की दो अलग-अलग अधिसूचना जारी है. सरकार 1 हजार करोड़ का कर्ज लेने जा रही है, जिसके लिए 500-500 करोड़ रुपये की कर्ज संबंधी अधिसूचना है.एक कर्ज 13 साल और दूसरा कर्ज 14 साल वर्ष के लिए इतनी ही स्टॉक सिक्योरिटीज की एवज में लिया जा रहा है. रिजर्व बैंक इंडिया की मुबंई शाखा के जरिए 25 फरवरी को कर्ज से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होंगी और 26 फरवरी को सरकार के खाते में धनराशि आएगी।

इससे पहले 5 फरवरी को भी प्रदेश सरकार ने 500 करोड़ रुपये कर्ज 10 वर्ष के लिए लिया है.बजट सत्र से पहले लिये जा रहे कर्ज को स्टेट डवेलपमेंट लोन नाम दिया गया है. जो विकास को गति देने के लिए लिया जा रहा है. हालांकि सरकार साल में सकल घरेलू उत्पाद का तीन प्रतिशत तक कर्ज उठा सकती है. लेकिन कर्ज हमेशा ही हिमाचल में सियासी मुद्दा रहा है. क्योंकि पैसे सदुपयोग न हुआ तो कर्ज बोझ बन सकता है. हिमाचल पहले ही 55 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज में डूबा है.हिमाचल प्रदेश में 25 फरवरी से बजट सत्र शुरू होने जा रहा है।

ऐसे में सरकार के लगातार कर्ज लेने के मुद्दे को विपक्षी दल जोरशोर से सदन में उठाएंगे. क्योंकि विपक्षी दल लगातार कर्ज के मुद्दे पर हो-हल्ला करते रहे हैं.हिमाचल प्रदेश की सरकार ने बीते दो माह में 2500 करोड़ रुपये कर्ज लिया है. इससे पहले, सात जनवरी को 500 करोड़ रुपये लोन लिया था. इसके बाद 31 जनवरी को भी दो अलग-अलग नोटिफिकेशन में 300 और 200 करोड़ का कर्ज सरकार ने उठाया था.

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