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नई दिल्ली. भारत में अभ‌िनेता ने नेता बनने का चलन पुराना है. ऐसे में अगर किसी धारावाहिक का प्रभाव ऐसा हो कि उसको देखने के लिए गांव के गांव की गलियां सूनी पड़ी जाएं तो कौन उन चेहरों पर दांव नहीं लगाना चाहेगा. हमने यहां भारत के दो सबसे प्रसिद्ध टीवी धारावाहिकों रामायण और महाभारत के किरदारों की राजनीति का पारियों का उल्लेख यहां किया है. जैसे रामायण के राम को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाना चाहते थे.

रावण ने बीजेपी की सीट पर चुनाव जीता था. महाभारत के कृष्‍ण, दिग्विजय सिंह के भाई से चुनाव हार गए थे. आइए विस्तार से जानते हैं रामायण और महाभारत के किरदारों के राजनीतिक सफर के बारे में…

रामायण के रावण यानी अरविंद त्रिवेदी ने साल 1991 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था. वे गुजरात के सबरकाठा सीट से चुनाव जीते थे. तब उन्होंने जीत भी हासिल की थी. साल 2002 में उन्हें सेंसर बोर्ड का एक्टिंग चेयरमैन भी नियुक्त किया गया था.

रामायण की सीता माता यानी दीपिका चिखलिया ने साल 1991 भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं. उन्होंने गुजरात की बड़ोदा सीट से जीत हासिल की थी. हाल ही में उन्होंने चुनावी प्रचार के दौरान की एक तस्वीर भी शेयर की थी जिसमें उनके साथ वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्‍ण आडवाणी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नजर आ रहे थे.

रामायण में हनुमान का किरदार निभाकर अमर होने वाले व मशहूर भारतीय पहलवान दारा सिंह ऐसे पहले खिलाड़ी थे, जिन्हें राज्य सभा के लिए नामांकित किया गया था. साल 2003 में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें राज्य सभा भेजा था. तब देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे.

महाभारत में भगवान श्रीकृष्‍ण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता नितीश भारद्वाज भारतीय जनता पार्टी के एक सक्रिय नेता रह चुके हैं. उन्होंने बाकयदा एक राजनीतिक पारी खेलने के बाद राजनीति से संन्यास लिया था. साल 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर झारखंड के जमशेदपुर से चुनाव जीता था. हालांकि साल 1999 के लोकसभा चुनाव में वे मध्य प्रदेश के राजगढ़ सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह से चुनाव हार गए थे. वे बीजेपी के प्रवक्ता भी रहे हैं.

महाभारत में कौरवों और पांडवों के पूर्वज राजा भरत की भूमिका निभाने वाला अभिनेता राज बब्बर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं. इससे पहले साल 1989 में ही जनता दल के सदस्य बने थे. इसके बाद समाजवादी पार्टी के टिकट पर तीन बार चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे. इसके बाद कांग्रेस की सीट पर उन्होंने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की बहू डिंपल यादव को उनकी सीट पर जाकर चुनाव हराया.

इसमें सबसे पहले नाम रामायण के राम यानी अरुण गोविल और हनुमान यानी दारा सिंह के आते हैं. इंडिया टुडे के एक लेख अनुसार राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस (आई) ने अरुण गोविल और दारा सिंह को पार्टी में ले आई थी. शीर्ष नेतृत्व चाहता था रामायण के राम यानी अरुण गोविल कांग्रसे (आई) के लिए इलाहाबाद (अब प्रयागराज), उधमपुर और फरीदाबाद सीट पर चुनावी प्रचार करें. इं‌डिया टीवी के एक लेख के अनुसार अरुण गोविल ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि पूर्व पीएम राजीव गांधी उन्हें इलाहाबाद से चुनाव भी लड़ना चाहते थे. लेकिन यह बात मूर्त रूप नहीं ले पाई. कहते हैं कि अरुण गोविल चुनाव लड़ने को लेकर सहज नहीं थे, उन्हें भगवान राम का किरदार निभाने के बाद चुनाव लड़ना बहुत अच्छा नहीं लग रहा था.

इसके अलावा महाभारत में गंगापुत्र भीष्म पितामह का किरदार निभाने वाले मुकेश खन्ना, यूठिष्ठिर का किरदार निभाने वाले गजेंद्र चौहान, द्रौपदी का किरदार निभाने वाली रूपा गांगूली तीनों ही कलाकारों का भारतीय जनता पार्टी से जुड़ाव रहा है. हालांकि ये तीनों कभी बीजेपी के टिकट पर चुनाव नहीं लड़े हैं. ऐसा कहा जाता है कि मुकेश खन्ना की राजनैतिक महत्वकांक्षा थी. लेकिन उन्हें कभी चुनाव में पार्टी का‌ टिकट नहीं मिला।

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