सोलन। फर्जी डिग्री देने के मामले में मानव भारती विश्वविद्यालय ने अपनी सफाई दी है। वेब मीडिया के पत्रकारो से बातचीत करते हुए मानव भारती की रजिस्ट्रार
डॉ अनुपमा ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने खुद फर्जी डिग्री मामले में धर्मपुर थाने में पिछले कई सालों से एफआईआर की हुई है। विश्वविद्यालय में किसी भी तरह से कोई भी फर्जी डिग्री नही दी जाती है।
हमारे यहाँ छात्रों का प्रवेश ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से होता है। जिसके रोलनम्बर और सीरियल नम्बर यूजीसी के नोर्म्स के तहत सारा प्रोसेस होता है। उन्होंने वेब मीडिया के पत्रकारो के समक्ष दस्तावेजो को प्रस्तुत करते हुए कहा कि मानव भारती विश्विद्यालय के नाम से फर्जी डिग्रीयां जारी करने के प्रकरण में उन्होंने स्वयं सेंकडो एफआईआर पुलिस में दर्ज करवाई है। ये डिग्रियां विश्वविद्यालय ने वेरिफिकेशन के दौरान पकड़ी है। जिसको विश्वविद्यालय ने किसी की गहरी साजिश रचने का अंदेशा बताया है।

ऐसे मामले सामने आने पर उन्होंने अखबार में कई पब्लिक नोटिस और इश्तिहार छपवाकर लोगों को अवगत करवाया था कि मानव भारती विश्विद्यालय का न तो कोई अन्य स्टडी सेंटर है, और न ही किसी अन्य राज्य में विश्वविद्यालय की कोई ब्रांच है। मानव भारती सोलन स्थित विश्वविद्यालय में ही छात्रों को शिक्षा प्रदान की जाती है। उन्होंने ये भी आरोप लगाया है कि मानव भारती विश्वविद्यालय द्वारा जारी डिग्री पर विवरण हस्तलिखित होता है।
जबकि जाली डिग्री पर विवरण टाइप किया गया है।डिग्री के विवरण में कई असमानताएं है। फर्जी डिग्रियों के रोलनम्बर की सीरीज मानव भारती के असली सीरीज से मेल नही खाती है। डिग्री पर किए गए हस्ताक्षर भी जाली है।उन्होंने कहा कि इस प्रकरण के सम्बंध में विश्वविद्यालय किसी भी जांच से निपटने को तैयार है साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों और अभिवावकों को इस भरम से बचने के लिए आश्वस्त किया है कि उनके बच्चो के भविष्य पर किसी भी प्रकार की आंच नही आएगी।
