मनाली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बुधवार दोपहर सर्किट हाउस से ढूंगरी स्थित माता हिडिंबा के मंदिर को रवाना हुईं। मंदिर पहुंचने पर उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना की और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। माता हिडिंबा के कुल पुरोहित मेहर चंद डिमणु ने पूजा करवाई। माता के कारदार एवं पुजारी रमण शर्मा ने उन्हें माता के ऐतिहासिक महत्व से अवगत करवाया। अटल टनल के दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने सिस्सू में स्थानीय महिलाओं से बात कर उनका हाल जाना और उनकी दिनचर्या को समझा। राष्ट्रपति के भ्रमण कार्यक्रम को लेकर मनाली से अटल टनल और हिडिंबा मंदिर तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे।
शाम अचानक मालरोड की सैर पर निकलीं
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बुधवार शाम अचानक मालरोड की सैर पर निकलीं। शाम करीब 5:13 बजे उनका काफिला मालरोड पहुंचा। राष्ट्रपति ने करीब 15 मिनट यहां बिताए और तिब्बत इम्पोरियम समेत भुट्टिको में खरीदारी की। राष्ट्रपति के मालरोड पहुंचते ही स्थानीय लोगों और पर्यटकों में उत्साह देखने को मिला। उनकी एक झलक पाने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ जुट गई। कई लोगों ने मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो बनाए। राष्ट्रपति ने भी लोगों का हाथ जोड़कर अभिवादन किया। मालरोड भ्रमण के दौरान राष्ट्रपति तिब्बत इम्पोरियम पहुंचीं। यहां उन्होंने खरीदारी की। तिब्बत इम्पोरियम के राजकुमार ने बताया कि राष्ट्रपति ने आम ग्राहक की तरह सहजता से बातचीत की। राजकुमार ने कहा कि राष्ट्रपति के इम्पोरियम में आने से वह उत्साहित और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
अटल टनल रोहतांग का भी दाैरा किया
इससे पहले दिन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अटल टनल रोहतांग पहुंचीं। समुद्रतल से करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी इस टनल के सामरिक महत्व और निर्माण कार्य की बारीकियों को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अफसरों से जाना। राष्ट्रपति ने इंजीनियरों की इस शानदार कारीगरी की सराहना की। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण टनल का उन्होंने करीब दो घंटे तक जायजा लिया। पहले उन्होंने टनल के साउथ पोर्टल का दौरा किया और इसके बाद लाहौल घाटी की ओर नॉर्थ पोर्टल पहुंचीं। उन्होंने टनल के अंदर फोटो और वीडियो भी लिए। राष्ट्रपति ने टनल की विजिटर बुक में अपने विचार भी दर्ज किए और हस्ताक्षर किए। उन्होंने टनल को वैश्विक मानकों की इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण बताया।
