शिमला। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के रोहडू दौरे पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। सत्ती ने कहा कि कल रोहडू की धरती पर कांग्रेस की अंतर्कलह और गुटबाजी का जो तमाशा जनता के सामने आया है, उसने यह साफ कर दिया है कि इस ‘मित्रमंडली’ की सुक्खू सरकार के दिन अब गिनती के बचे हैं। उन्होंने कहा कि जिस रोहडू क्षेत्र को पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने सींचा, उसी रोहडू के सरकारी कार्यक्रम से उनकी तस्वीर गायब करना और वीरभद्र परिवार को अपमानित करना कांग्रेस की तानाशाही व बदले की राजनीति का सबसे घटिया उदाहरण है।
सत्ती ने सुक्खू गुट पर सीधा प्रहार करते हुए कहा, “कांग्रेस आज हिमाचल में जिस मुकाम पर भी खड़ी है, वह केवल और केवल स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के नाम की बदौलत है।” उन्होंने याद दिलाया कि वीरभद्र सिंह रोहडू से 5 बार विधायक रहे और वहां कांग्रेस की हर जीत का मुख्य आधार वही थे। जब सुक्खू गुट ने वीरभद्र सिंह को दरकिनार करके रोहडू उपचुनावों में जबरदस्ती अपना प्रत्याशी उतारा, तब वहां की स्वाभिमानी जनता ने कांग्रेस प्रत्याशी को लगभग 10 हजार वोटों के भारी अंतर से करारी शिकस्त देकर घर बिठाया था।
भाजपा नेता ने कांग्रेस की सांगठनिक रीति-नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपने ही बड़े नेताओं को दरकिनार करना कांग्रेस का पुराना इतिहास रहा है। देश में पी.वी. नरसिम्हा राव और डॉ. मनमोहन सिंह जैसे कद्दावर नेताओं को किनारे लगाना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है और अब यही दमनकारी नीति हिमाचल में भी दोहराई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोहडू ही नहीं, बल्कि हाल ही में रामपुर में हुए सरकारी कार्यक्रमों में भी जानबूझकर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह को दूर रखा गया और उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया गया, जो वीरभद्र परिवार के प्रति सरकार के सौतेले व्यवहार को पूरी तरह उजागर करता है ।
सत्ती ने संगठन के बिखराव का जिक्र करते हुए कहा कि जब प्रतिभा सिंह कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्षा थीं, तब उन्होंने खुद कई बार खुले तौर पर सरकार और संगठन में आपसी तालमेल न होने की बात कही थी और वे सरकार के रवैये से बेहद नाराज थीं। आज स्थिति यह है कि न केवल प्रदेश की आम जनता सुक्खू सरकार से त्रस्त है, बल्कि खुद कांग्रेस के दिग्गज नेता भी मुख्यमंत्री की इस तानाशाही कार्यप्रणाली से घुट-घुट कर जीने को मजबूर हैं।
सुखविंदर सिंह सुक्खू जो भाजपा पर गुटबाजी का आरोप लगते हैं , आज खुद उनकी पार्टी गुटों में बंटी हुई नज़र आ रही है । कांग्रेस के मंत्रियों से लेकर कार्यकर्ता तक आज अपनी ही सरकार के कार्यों एवं निर्णयों से बुरी तरह परेशान हैं और प्रदेश की जनता भी कांग्रेस को उसकी करनी का फल देने के लिए तैयार बैठी है और इस जनविरोधी ‘मित्रमंडली सरकार’ को सत्ता से उखाड़ने के लिए आगामी चुनावों का इंतजार कर रही है।
