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कसौली। प्रदेश के विभिन्न विकास खंडों में ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत कार्यरत तकनीकी सहायकों को पिछले करीब छह महीनों से वेतन नहीं मिला है। समय पर वेतन का भुगतान न होने के कारण कर्मचारी गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। नियमित रूप से अपनी सेवाएं देने के बावजूद लगातार हो रही इस देरी से तकनीकी सहायकों में सरकार व विभाग के प्रति भारी रोष पनप रहा है।
परिवार चलाना और बैंक किश्तें चुकाना हुआ मुश्किल
तकनीकी सहायकों का कहना है कि बीते 6 महीनों से वेतन न मिलने की वजह से उनके लिए दैनिक खर्च पूरे करना, बच्चों की पढ़ाई की फीस भरना और बैंक ऋण की मासिक किस्तें (EMI) चुकाना बेहद कठिन हो गया है। स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि कई कर्मचारियों को अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए दूसरों से उधार लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई के इस दौर में बिना वेतन के लगातार काम करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं तकनीकी सहायक
उल्लेखनीय है कि ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की योजनाओं को धरातल पर उतारने में तकनीकी सहायकों की अहम भूमिका होती है। वे पंचायतों में मुख्य रूप से:
मनरेगा (MGNREGA) कार्यों की तकनीकी जांच,
निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण,
माप पुस्तिका (Measurement Book) तैयार करना,
योजनाओं की लागत का सटीक आकलन करना,
और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में जारी विकास कार्यों को समय सीमा के भीतर पूरा कराने में इनकी भूमिका के बावजूद, इन्हें महीनों तक अपने मेहनताने के लिए भटकना पड़ रहा है।
700 कर्मचारियों का भविष्य अधर में, सुविधाएं न मिलने से नाराजगी
तकनीकी सहायक संघ की अध्यक्ष संजू देवी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश भर में लगभग 700 तकनीकी सहायक कार्यरत हैं, जिनमें से करीब 350 सहायकों का वेतन मनरेगा मद से आता है।
उन्होंने व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2008 के बाद नियुक्त हुए तकनीकी सहायकों को न तो छठे वेतन आयोग (6th Pay Commission) का लाभ दिया गया है और न ही अन्य बुनियादी सुविधाएं मिल पा रही हैं। विकास खंडों के अंतर्गत दूर-दराज की पंचायतों में आने-जाने का यात्रा खर्च भी कर्मचारियों को खुद अपनी जेब से वहन करना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री और पंचायती राज मंत्री से न्याय की गुहार
तकनीकी सहायक संघ की अध्यक्ष संजू देवी, उपाध्यक्ष कैलाश कौशिक, नीतू सोनी, कश्मीर राणा, विजेंद्र कुमार, और अजय कुमार सहित अन्य प्रतिनिधियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और पंचायती राज मंत्री से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
कर्मचारियों ने मांग की है कि:
पिछले 6 माह से रुका हुआ वेतन तुरंत जारी किया जाए।
अन्य श्रेणियों के तकनीकी सहायकों की तर्ज पर उन्हें भी समान वेतनमान और अन्य सरकारी सुविधाएं प्रदान की जाएं।
2008 के बाद नियुक्त सहायकों को छठे वेतन आयोग का लाभ दिया जाए।
कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को ग्रामीण विकास में उनकी भूमिका को समझते हुए प्राथमिकता के आधार पर उनकी समस्याओं का स्थाई समाधान निकालना चाहिए।

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