शिमला 3 अक्टूबर। जिला शिमला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष हरिकृष्ण हिमराल ने देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 मे मुख्य चुनाव आयुक्त के तथा निर्वाचन आयुक्तों को उनके कार्यकाल के दौरान या उसके बाद, अपने आधिकारिक कर्तव्यों के पालन में किए गए किसी भी कार्य मेब दीवानी या आपराधिक कार्यवाही से सुरक्षा प्रदान कर इन अधिकारियों को खुली छूट देकर देश के साथ घोर अन्याय किया है। उन्होंने कहा है कि इस कानून ने चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर उनकी जगह एक कैबिनेट मंत्री को शामिल कर दिया, जिससे 2023 के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को बदल दिया गया।
अब उन्हें उनके पद से केवल संसद में महाभियोग की प्रक्रिया के माध्यम से ही हटाया जा सकता है, जैसे कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को हटाया जाता है।
लोक प्रहरी जैसे एनजीओ द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कर धारा 16 को चुनौती दी गई है, जिसमें यह तर्क दिया गया है कि यह असीमित अधिकार देता है।
आज यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरिकृष्ण हिमराल ने कहा कि यह कानून अधिकारियों को जवाबदेही से बचाता है, जबकि समर्थकों का मानना है कि यह चुनाव आयोग की स्वतंत्र कार्यप्रणाली की रक्षा करता है।
हिमराल ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक निरकुंश तानाशाह के तौर पर कार्य कर रहें है। एस आई आर के नाम पर दो चुनाव आयुक्तों की सिफारिशों को दर किनार करते हुए देश के 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं को उनके संवेधानिक अधिकार से बंचित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि देशभर में कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के इस घोर अपराध के खिलाफ लोकतंत्र बचाओ देश बचाओ अभियान को चलाये हुए है।
हिमराल ने मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से बर्खास्त करने व उनपर देशद्रोह का मुकदमा चलाये जाने की मांग करते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन राहुल गांधी के नेतृत्व में केंद्रीय चुनाव आयोग की तानाशाही व इस अपराध के खिलाफ देश के साथ खड़ा है। लोकतंत्र की हत्या,जनमत को चोरी के खिलाफ कांग्रेस अब पीछे हटने वाली नही। इस जनमत की चोरी के लिये देश के गृह मंत्री अमित शाह भी पूरी तरह जिम्मेदार है उन्हें भी अब इस पद पर बने रहने का कोई अधिकार नही है। अमित शाह भी अपने पद से इस्तीफा दे।
