शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर मजदूरों के प्लायन, उन पर दर्ज मुकद्दमों, मजदूरों के भोजन व उन्हें घर भेजने के प्रबंधों इत्यादि से जुड़ी जानकारी मांगी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इसे लेकर बुधवार को पुलिस महानिदेशक, सभी जिलाधीश और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। इन्हें एक सप्ताह के भीतर जानकारी देनेको कहा गया है। इसके बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में कंप्लायंस रिपोर्ट देगी। प्रधान सचिव राजस्व डॉ. ओंकार शर्मा ने इसकी पुष्टि की है।
राज्य सरकार ने श्रम एवं रोजगार विभाग को भी पत्र लिखकर यह पूछा है कि कामगार कल्याण बोर्ड के माध्यम से कितने पंजीकृत मजदूरों की आर्थिक मदद की गई है। प्रदेश में कोरोना से पहले बेरोजगारों की संख्या क्या थी और अब क्या है। यह जानकारी देने को कहा गया है। देशव्यापी लॉकडाऊन के दौरान देशभर में लाखों मजदूरों ने पैदल चलकर घर वापसी की है। इस दौरान कुछेक मजदूर सड़क हादसों का शिकार भी हुए हैं। इसके बाद कुछ लोगों ने मजदूरों के पैदल घर जाने पर पाबंदी के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।
इस अर्जी को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह कहकर खारिज किया था कि पैदल चलने वालों पर रोक नहीं लगाई जा सकती, लेकिन कोर्ट ने सभी राज्य सरकार को यह सुनिश्चित बनाने के आदेश दिए थे कि 15 दिनों के भीतर सभी मजदूर अपने-अपने घरों को लौट जाएं। कोर्ट के इन आदेशों पर ही राज्य सरकार को देश की शीर्ष अदालत में कंप्लायंस रिपोर्ट देनी है। हिमाचल से भी 90 हजार से ज्यादा मजदूर अपने-अपने घरों को लौटे हैं। ज्यादातर मजदूरों को केंद्र सरकार द्वारा चलाई गई विशेष ट्रेनों से उनके घर भेजा गया है। इसी तरह कुछ मजदूरों को सरकार ने बसों के जरिए भी घर भेजा है।
