शिमला। जनगणना की नई अधिसूचना हिमाचल प्रदेश के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में एक सितम्बर से 30 सितंबर तक जनसंख्या गणना का कार्य किया जाएगा। इसको लेकर केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। इस दौरान शिमला जिला सहित किन्नौर लाहौल स्पीति जिला में जनगणना होगी। वहीं इसके अलावा जिला चंबा कुल्लू , मंडी और सिरमौर जिला के बर्फबारी वाले कुछ एक क्षेत्रों में जनगणना का दूसरा दौर शुरू होगा। सरकार ने इस बार जनगणना प्रक्रिया को अधिक आधुनिक और डिजिटल बनाने के लिए सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा भी शुरू की है। अधिसूचना के अनुसार संबंधित क्षेत्रों के नागरिक 17 से 31 अगस्त तक स्वयं ऑनलाइन अपनी और परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद जनगणना कर्मी घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन और जनसंख्या गणना करेंगे। गृह मंत्रालय के तहत भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार हिमाचल प्रदेश के बर्फबारी वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों में 1 सितंबर से 30 सितंबर तक जनसंख्या गणना का कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले क्षेत्रों और उत्तराखंड के चिन्हित इलाकों में भी इसी अवधि के दौरान जनगणना होगी। सरकार ने इस बार जनगणना प्रक्रिया को अधिक आधुनिक और डिजिटल बनाने के लिए सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा भी शुरू की है।
इस जनगणना में जिस व्यक्ति की जहां उपस्थिति होगी, उसी आधार पर उसे संबंधित क्षेत्र की जनसंख्या में शामिल किया जाएगा। वहीं, किसी भी छूटी हुई जानकारी या त्रुटि को ठीक करने के लिए 1 से 5 अक्टूबर तक रिवीजन राउंड भी आयोजित किया जाएगा। दरअसल, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड के कई ऊंचाई वाले इलाकों में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी होती है, जिससे संपर्क मार्ग बंद हो जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में सामान्य समय पर जनगणना कराना संभव नहीं होता। इसी कारण इन क्षेत्रों के लिए अलग समय-सारणी तय की जाती है, ताकि प्रत्येक व्यक्ति की सही और सटीक गणना सुनिश्चित की जा सके। जनगणना केवल आबादी की गिनती भर नहीं होती, बल्कि इसके आंकड़ों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा, स्वास्थ्य, सडक़, बिजली, पेयजल, राशन, आवास, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, पंचायतों और शहरी निकायों के विकास सहित विभिन्न योजनाओं की रूपरेखा तैयार करती हैं।
भविष्य की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण
संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन, संसाधनों के आवंटन तथा भविष्य की विकास योजनाओं में भी जनगणना के आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस बार जनगणना में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। नागरिकों को पहली बार घर बैठे स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प मिलेगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और सटीक होने की उम्मीद है। इसके बाद जनगणना कर्मी घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे और अंतिम आंकड़े तैयार किए जाएंगे।
