सोलर पैनल के प्रकार
बाजार में इस समय आपको अलग अलग कलर के सोलर पैनल(solar panel) आपको देखने को मिलेंगे।किसी का कलर काला होगा तो किसी का नीला तो किसी का धब्बेदार,अब अगर आप अपने घर,दुकान,ऑफिस, स्कूल,अस्पताल आदि के Solar panel खरीदना चाहते हैं लेकिन आप कंफ्यूज हैं कि आपके लिए कौन सा सोलर पैनल अच्छा रहेगा तो आज आप इस पोस्ट को पूरा पढ़े।मैने आपको अपनी पिछली पोस्ट में बताया था कि एक सोलर पैनल कैसे बनता है आज मैं आपको इस पोस्ट में बताऊंगा की सोलर पैनल कितने प्रकार के बनाये जाते हैं और आपके लिए सबसे अच्छा सोलर पैनल कौन सा होगा।
दोस्तों जैसा कि मैंने अपनी पिछली पोस्ट Solar panel कैसे बनता है में बताया था कि सोलर पैनल का सबसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट सिलिकॉन फोटोवोल्टिक सोलर सेल(Silicon photovoltaic solar cell) होता है।चूकिं सिलिकॉन फोटोवोल्टिक होता है फोटोवोल्टिक का मतलब हुआ कि सूरज के प्रकाश से बिजली उतपन्न करने की क्षमता रखना।इसलिए सोलर पैनल बनाने के लिए अधिकतर सिलिकॉन धातु का यूज किया जाता है।
सिलिकॉन धातु पृथ्वी पर ऑक्सीजन के बाद दूसरी सबसे अधिक पाई जाने बाली चीज है।Silicon धातु को सेंड यानी रेत से निकाला जाता है रेत से सिलिकॉन धातु निकालने का एक लंबा प्रोसेस होता है जिसे मैंने अपनी पिछली पोस्ट में बताया है।अब इस Silicon धातु से मुख्यता तीन प्रकार के सोलर पैनल बनाये जाते है जो इस प्रकार हैं-
1.मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल(Mono Crystalline Solar Panel)
2.पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल(Polycrystalline Solar Panel)
3.थिन फ़िल्म सोलर पैनल(Thin film solar panel)
1.मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल(Mono Crystalline Solar Panel)

मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल में प्योर क्वालिटी का सिलिकॉन सेल लगाया जाता है।रॉ सिलिकॉन में से प्योर सिलिकॉन निकलना थोड़ा महँगा पड़ता है इसलिए मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल का प्राइस अन्य क्वालिटी के सोलर पैनल से थोड़ा अधिक होता हैं।मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल की पहचान की बात करें तो इस प्रकार के सोलर पैनल में काले कलर से सोलर सेल लगे होते हैं।मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल(Mono Crystalline Solar Panel) की पॉवर जनरेट करने के क्षमता अन्य प्रकार के सोलर पैनल से ज्यादा होती है।मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल सौर ऊर्जा को 20 से 22% विधुत ऊर्जा में परिवर्तित कर सकते हैं।इसलिए इनका efficiency rate 20-22% बोला जाता है।
मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल ऐसे क्षेत्र के लिए बढ़िया हैं जो ऊँचाई बाले या ज्यादा ठंडे इलाके बाले हैं जहां धूप कम समय के लिए निकलती है और मौसम में ठंडी ज्यादा रहती है ऐसी जगह के लिए मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल(Mono Crystalline Solar Panel) बढ़िया रहते हैं क्योंकि ये कम धूप में भी बढ़िया काम करते हैं।मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल धूप को जल्दी कैप्चर कर लेता है।किसी भी अच्छी कंपनी का मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल आपको 50 रुपये प्रति वॉट तक मिल जाएगा।अगर आप 100 वॉट का मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल खरीदते हैं तब आपको 5000 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल की वारण्टी/गारण्टी की बार करें तो कंपनी आपको 5 साल की फुल पॉवर आउटपुट की गारण्टी देता है और 20 साल तक कि करीब 80% पॉवर जनरेट की वारण्टी देता है।मतलब एक बार आपको बस पैसे खर्च करने पड़ेंगे और आप 25 साल तक मुफ्त में बिजली बना सकते हैं।ये भी पढ़ेंसोलर पैनल कैसे बनता है और सोलर पैनल कैसे बिजली बनाता है?जानिए स्टेप बाय स्टेप
2.पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल(Polycrystalline Solar Panel)

बाजार में सबसे पहला पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल सन 1981 में आया था जिसे हम पॉली सिलिकॉन और मल्टी क्रिस्टलाइन सिलिकॉन(polysilicon (p-Si) and multi-crystalline silicon (mc-Si)) के नाम से भी जानते हैं।पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल में जो सिलिकॉन सेल लगता है उसे मोनो सिलिकॉन की तरह जोक्रैल्स्की प्रोसेस(Czochralski process) की जरूरत नही होती है।Czochralski process में रॉ सिलिकॉन में से 100% प्योर सिलिकॉन को एक बड़े सिलिंडर के फॉर्म निकालकर अलग किया जाता है।लेकिन पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल(Polycrystalline Solar Panel) को रॉ(कच्चे) सिलिकॉन को एक चौकोर ढांचे पिघलाकर इसे ठंडा होने पर पतले पतले स्क्वायर फॉर्म में काट कर अलग कर लिया जाता है जिसे हम सिलिकॉन सोलर वेफर भी बोलते हैं।

पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल को ऐसे क्षेत्र में लगाया जाता है जहाँ गर्मी ज्यादा और ठंड कम पड़ती है।पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल की कीमत मोनो की अपेक्षा कम होती है क्योंकि इसमें सिलिकॉन की प्योर फॉर्म नही होती है।पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल(Polycrystalline Solar Panel)आपको बाजार में 30 से 40 रुपये प्रति वाट तक मिल जाएंगे।पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल में लगे सोलर सेल का कलर नीला या नीला धब्बेदार होता है।आपको किसी भी अच्छी कंपनी का 100 वाट का सोलर पैनल 4000 रुपये तक मिल जाएगा और आपको 5 साल की uncondition गारण्टी मिलेगी और उसके बाद 20 साल की वारण्टी मिलेगी मतलब की 25 साल की लाइफ होती है पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल की।
पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल की बिक्री मोनो सोलर पैनल से ज्यादा होती है क्योंकि यह थोड़े सस्ते पड़ते हैं।अब पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल की efficiency की बात करें तो इसकी efficiency 15 से 18% होती है।इसका मतलब यह हुआ कि पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल(Polycrystalline Solar Panel) पर पड़ने बाली धूप से यह पैनल 15 से 18% बिजली बनाने में सक्षम होते हैं जबकि मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल की efficiency 20 से 22% तक होती है।
3.थिन फ़िल्म सोलर पैनल(Thin film solar panel)

थिन फ़िल्म सोलर पैनल(Thin film solar panel) सिलिकॉन धातु के साथ अन्य कई धातुओं को मिलाकर बनाये जाते हैं। इनकी कीमत पॉली और मोनो सिलिकॉन सोलर पैनल की अपेक्षा बहूत कम होती है।यह बहूत पतले होते हैं इनकी एक खासियत यह होती है कि इनको आप फोल्ड भी कर सकते हैं और जैसे चाहे वैसे मोड़ सकते हैं और शायद भविष्य में इस प्रकार के सोलर पैनल का भी अधिक उपयोग होगा ।इनकी बिजली बनाने की क्षमता 9 से 12% होती है। अपने केलकुलेटर में थिन फ़िल्म सोलर पैनल लगकर आता है।अपने भारत में इस तरह के सोलर पैनल कुछ ही कंपनियां बनाती हैं।अगर आपका लोड कम है तो आप इस प्रकार के सोलर पैनल लगवाकर पैसों की बचत कर सकते हैं।इन पतली धातु के सोलर पैनल को निम्न कैटेगरी में बाटा गया है जो इस प्रकार हैं-
1.Amorphous silicon (a-Si)
2.Cadmium telluride (CdTe)
3.Copper indium gallium selenide (CIS/CIGS)
4.Organic photovoltaic cells (OPC)
सबसे अच्छा सोलर पैनल कौन सा होता है?

अगर आप सोलर पैनल लगवाने की सोच यह है तब मैं आपको मोनो क्रिस्टलाइन सिलिकॉन सोलर पैनल या मोनो सोलर पैनल लगवाने की सलाह दूंगा क्योंकि मोनो सोलर पैनल की बिजली बनाते की क्षमता अन्य प्रकार के सोलर पैनल से ज्यादा होती है।मोनो सोलर पैनल सर्दियों में भी अच्छी पॉवर जनरेट कर सकते हैं और इनकी लाइफ भी अन्य प्रकार के सोलर पैनल से ज्यादा होती है।अब आपको समझ मे आ गया होगा कि आपको सोलर पैनल के प्रकार के बारे में पता चल गया होगा अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगे तो इसे जरूर शेयर करें और हमें कमेंट बॉक्स में बताए आपको पोस्ट कैसी लगी और आपके मन मे क्या सबाल या सुझाव है हमे नीचे कमेंट बॉक्स में बताएं।
