शिमला | हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने डिप्टी व्हिप के पद को चुनौती देने वाली याचिका में वर्तमान पद पर तैनात केवल सिंह पठानिया को नोटिस जारी किया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के आवेदन को स्वीकार करते हुए ये आदेश दिए। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रजनीश मनीकटाला ने बताया कि प्रदेश ने मुख्य व्हिप और डिप्टी व्हिप बनाने के लिए जो कानून बनाया है, वह संविधान के नियमों के खिलाफ है। इस कानून का निर्माण केवल राजनीति लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह याचिका वर्ष 2019 में दायर की गई थी। याचिका में बताया गया है कि जब यह कानून बनाया गया, उस समय प्रदेश पर 41 हजार करोड़ का बोझ था। 6 साल बीत जाने के बाद राज्य पर जो लोन का बोझ है 90 हजार करोड़ से भी ऊपर हो गया है। प्रदेश में सरकार चाहे किसी भी पार्टी की रही हो, अपने राजनीति संतुलन को बनाए रखने के लिए ऐसे पदों को स्थापित किया जाता है। बता दें कि साल 2018 में प्रदेश विधानसभा में कानून लाकर चीफ व्हिप और डिप्टी चीफ व्हिप को नियुक्त करने का प्रावधान किया गया था। कैबिनेट दर्जे की सुविधाएं देने का इन्हें फैसला लिया गया था।
