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मंडी। सदर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति दशकों से स्वर्गीय पंडित सुखराम के परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अब एक बार फिर इस राजनीतिक विरासत और सत्ता के समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सदर से भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री अनिल शर्मा के कांग्रेस में लौटने की अटकलों ने दोनों दलों के भीतर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। हालांकि अनिल शर्मा की कांग्रेस में वापसी को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और उनके समर्थक भी इन अटकलों को नकार रहे हैं। इस बात में भी कोई दो मत नहीं हंै कि जहां कांग्रेस अनिल शर्मा की वापसी चाहती है, तो वहीं भाजपा के अंदर भी कई नेता इन अटकलों से खुश जरूर हैं। सोशल मीडिया पर यह सवाल पिछले कई दिनों से वायरल है। गौर हो कि अनिल शर्मा ने अपने पिछले दो चुनाव भाजपा के चुनाव चिन्ह पर ही लड़े और जीते हैं। हालांकि पूर्व भाजपा सरकार के समय उनके बेटे आश्रय शर्मा द्वारा कांग्रेस टिकट पर लोकसभा का चुनाव लडऩे के बाद अनिल शर्मा को भाजपा के अंदर काफी जलालत सहनी पड़ी थी, लेकिन इसके बाद भी अनिल शर्मा भाजपा में टिके रहे और फिर से भाजपा टिकट पर ही चुनाव जीत कर मंडी से विधायक बने।

अनिल शर्मा के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी बेहतर संबंध हैं। इसके साथ ही पार्टी सांसदों को लेकर भी अनिल शर्मा ने अपनी राय में कई सवाल खड़े किए और यह बातें भाजपा हाईकमान को भी खरी नहीं लगी हैं। सदर विधायक अनिल शर्मा हालांकि इन सब बातों को लेकर अब मौन जरूर हैं, लेकिन वह पहले कई बार यह जरूर कह चुके हैं कि पिछले विधानसभा चुनावों के समय कांग्रेस पार्टी ने उन्हें डिप्टी सीएम बनाने का प्रस्ताव जरूर दिया था और उन्होंने उसके बाद भी भाजपा नहीं छोड़ी थी। हालांकि अगर अब अनिल शर्मा फिर से कांग्रेस में वापसी करते हैं, तो भाजपा के साथ ही कांग्रेस के अंदर भी कई राजनीतिक समीकरण बदल जाएंगे। सदर से लगातार चुनाव हार रही कांग्रेस के अंदर चल रही बदलाव की बयार को झटका लगेगा, तो वहीं भाजपा में किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा।

कांग्रेस में टूटेंगी कई उम्मीदें

अनिल शर्मा अगर फिर से कांग्रेस पार्टी में लौटते हैं, तो सदर कांग्रेस के कई चेहरों को झटका लगेगा। सदर से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चंपा ठाकुर लगातार दो चुनाव हार चुकी हैं। उनकी जगह अब सदर से कांग्रेस के नए चेहरे को उतारने की पैरवी भी हो रही है। कांग्रेस में सत्ता के समीकरण बदलने के बाद मुख्यमंत्री के करीबी कई चेहरे भी अब सदर से चुनाव लडऩे के इच्छुक हैं, लेकिन अनिल शर्मा के कांग्रेस में लौटते ही इन सब चेहरों को निराशा हाथ लगेगी।

भाजपा में नई आशाओं को पंख

इन चर्चाओं के बीच भाजपा के अंदर जरूर टिकट के तलबगारों को फिर से उम्मीद जगी है। इसमें सुमन ठाकुर, रणवीर सेन, नरेंद्र गुलेरिया, राजेश कपूर, भुवनेश ठाकुर, मनीष कपूर औरअनुपमा सिंह सहित कई अन्य नाम शामिल हैं। हालांकि यहां यह बात भी बड़ी दिलचस्प है कि ऐसे हालात में चंपा ठाकुर भी कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हो सकती हैं। इस तरह की चर्चाएं भी अक्सर सुनी जा रही हैं। इसके अलावा आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे भास्कर ठाकुर के लिए भी नए अवसर बनेंगे।

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