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सोलन, 14 अक्टूबर। शूलिनी यूनिवर्सिटी के एप्लाइड साइंसेज और बायोटेक्नोलॉजी फैकल्टी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रवि कांत को जर्मनी में आयोजित होने वाले ‘बायोटेक्नोलॉजी एंड बायोमेडिकल इनोवेशन रिसर्च टूर 2026’ के लिए दुनिया भर से चुने गए 30 अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं में शामिल किया गया है। यह कार्यक्रम 8 से 14 नवंबर, 2026 तक बर्लिन में आयोजित होगा।
इस टूर का आयोजन जर्मन एकेडमिक एक्सचेंज सर्विस (DAAD) कर रही है। यह जर्मनी की ‘रिसर्च इन जर्मनी’ पहल का हिस्सा है और इसे जर्मन फेडरल मिनिस्ट्री ऑफ रिसर्च, टेक्नोलॉजी एंड स्पेस (BMFTR) से वित्तीय सहायता मिलती है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा और उभरते शोधकर्ताओं को जर्मनी के प्रमुख विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, फंडिंग एजेंसियों और नवाचार संगठनों से जोड़ना है। डॉ. कांत का चयन प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से हुआ है। DAAD उनकी यात्रा, रहने, बीमा और कार्यक्रम से जुड़े खर्चों का पूरा वहन करेगा।
एक सप्ताह तक चलने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत ‘फॉलिंग वॉल्स साइंस समिट’ के अंतिम दिन से होगी। इसके बाद डॉ. कांत हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी ऑफ बर्लिन में आयोजित ‘जर्मन रिसर्च इनसाइट डे’ में भाग लेंगे। इस दौरान DAAD, जर्मन रिसर्च फाउंडेशन (DFG), मैक्स प्लैंक सोसाइटी और प्रोजेक्टट्रैगर जूलिच के विशेषज्ञ जर्मनी में शोध के लिए उपलब्ध फंडिंग, करियर और सहयोग के अवसरों की जानकारी देंगे। कार्यक्रम में शोधकर्ताओं के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने के लिए नेटवर्किंग सत्र भी आयोजित किया जाएगा।
टूर के दौरान डॉ. कांत जर्मनी के कई प्रतिष्ठित शोध संस्थानों का दौरा करेंगे। इनमें टेक्नीशे यूनिवर्सिटी बर्लिन और चैरिटे यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल से जुड़ा संयुक्त शोध केंद्र ‘डेर सिमुलिएर्टे मेन्श’ (Der Simulierte Mensch) शामिल है। इसके अलावा, वह फ्री यूनिवर्सिटी ऑफ बर्लिन, आइंस्टीन फाउंडेशन बर्लिन, मैक्स डेलब्रुक सेंटर के बर्लिन इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल सिस्टम्स बायोलॉजी और हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी ऑफ बर्लिन के कार्यक्रमों में भी भाग लेंगे। इस दौरान उन्हें विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से मिलने तथा उनके साथ शोध के नए अवसरों पर चर्चा करने का मौका मिलेगा।
डॉ. कांत कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी, दवा खोज, संक्रामक रोगों, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (रोगाणुरोधी दवाओं के प्रति प्रतिरोध) और वैक्सीन रिसर्च के क्षेत्र में काम करते हैं। उन्हें बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन से जुड़े पुरस्कारों सहित लगभग 23 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं। हाल ही में उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन के सहयोग से यूके की एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज द्वारा एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) विजिटिंग प्रोफेसरशिप प्रदान की गई। उन्हें ब्राजील की यूनिवर्सिडेड डो एक्सट्रेमो सुल कैटारिनेस (UNESC) में हेल्थ साइंसेज के पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में विजिटिंग प्रोफेसर भी नियुक्त किया गया है।
डॉ. कांत के इस चयन से शूलिनी यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय शोध कार्यों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस दौरे से बायोटेक्नोलॉजी और बायोमेडिकल इनोवेशन के क्षेत्र में शूलिनी यूनिवर्सिटी और जर्मनी के शोध संस्थानों के बीच सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं। इससे संयुक्त शोध परियोजनाओं, फैकल्टी एक्सचेंज और विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय शोध अनुभव के अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है

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