सोलन। हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीएसपीसीबी) द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के उल्लंघन के संबंध में नगर परिषद परवाणू के कार्यकारी अधिकारी पर 11,85,000 का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है। बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय, परवाणू द्वारा सेक्टर-5 स्थित ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण स्थल के बार-बार किए गए निरीक्षणों के दौरान ठोस कचरे के अनुचित प्रबंधन से संबंधित कई कमियां पाई गईं। इनमें मिश्रित एवं बिना पृथक्करण किए गए कचरे का ढेर लगना, नियमित रूप से कचरे का उठान न होना, स्थल को उचित रूप से ढका न जाना तथा वर्षा के दौरान लीचेट उत्पन्न होने से सेक्टर-5 नाले एवं सुखना नाले के जल की गुणवत्ता प्रभावित होने का जोखिम शामिल है।
इसके अतिरिक्त, स्थल पर दुर्गंध, लावारिस आवारा पशुओं एवं मक्खियों की समस्या तथा कचरा प्रबंधन में लगे कर्मचारियों को आवश्यक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध न करवाने जैसी कमियां भी पाई गईं। बार-बार कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने एवं निर्देश दिए जाने के बावजूद नगर परिषद द्वारा प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। इसके परिणामस्वरूप, माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों एवं लागू प्रावधानों के अनुरूप कुल 11.85 लाख का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है। नगर परिषद को उक्त मुआवजा सात दिनों के भीतर जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित अवधि में राशि जमा न करवाने की स्थिति में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 तथा लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के अंतर्गत आगे की कार्रवाई की जाएगी। एसडीओ प्रदूषण विभाग अनूप वैद ने पुष्टि कि हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वैज्ञानिक तरीके से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कचरे का उचित पृथक्करण एवं निस्तारण, लीचेट से जल प्रदूषण की रोकथाम तथा जनस्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
