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सोलन, 26 अक्टूबर। शूलिनी यूनिवर्सिटी ने अपने F ब्लॉक में नए और अपग्रेड किए गए मीडिया स्टूडियो, स्मार्ट क्लासरूम और कोलैबोरेटिव लर्निंग स्पेस का उद्घाटन किया है। इससे ‘स्कूल ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशंस’ और ‘स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स’ के छात्रों की प्रैक्टिकल लर्निंग और मजबूत होगी।इन सुविधाओं का उद्घाटन चांसलर प्रो. पी. के. खोसला और प्रो-चांसलर प्रो. विशाल आनंद ने किया। उनके साथ फैकल्टी ऑफ मीडिया एंड लिबरल आर्ट्स की ट्रस्टी, प्रेसिडेंट और डीन प्रो. निष्ठा शुक्ला आनंद भी मौजूद थीं।यह फैकल्टी अब G और H ब्लॉक से शिफ्ट होकर पूरी तरह से सुसज्जित और आधुनिक F ब्लॉक में आ गई है। यहाँ पढ़ाने, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देने और छात्रों के बीच आपसी बातचीत के लिए बेहतर सुविधाएं मौजूद हैं।
इन नई सुविधाओं में सबसे खास है अपग्रेड किया गया टेलीविजन स्टूडियो। इसमें एंकर के लिए खास कुर्सियां, साउंडप्रूफिंग और ‘शूलिनी स्पॉटलाइट’ (यूनिवर्सिटी का साप्ताहिक पॉडकास्ट) के लिए एक विशेष सेट तैयार किया गया है। इस पॉडकास्ट में अलग-अलग क्षेत्रों के मेहमान आते हैं। इसे पूरी तरह से मीडिया के छात्र ही तैयार करते हैं, जो डॉ. पार्थ शर्मा के मार्गदर्शन में शूटिंग, एडिटिंग और पब्लिशिंग का काम संभालते हैं।नए रेडियो स्टूडियो में आधुनिक रिकॉर्डिंग सुविधाएं मौजूद हैं, जिससे छात्रों को रेडियो स्क्रिप्ट राइटिंग, ऑडियो रिकॉर्डिंग और एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव मिलता है। स्कूल ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशंस की डॉ. इंदु नेगी इस स्टूडियो का प्रबंधन करती हैं।
अपग्रेड किए गए क्लासरूम में इंटरैक्टिव शिक्षण के लिए टचस्क्रीन स्मार्ट बोर्ड लगाए गए हैं। इसके अलावा, एक छोटी लाइब्रेरी और एक विशेष सहयोगी क्षेत्र (कोलैबोरेटिव एरिया) भी बनाया गया है, ताकि छात्र आपस में विचारों का आदान-प्रदान कर सकें, प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकें और एक साथ मिलकर सीख सकें।
इस अवसर पर बोलते हुए, प्रो. विशाल आनंद ने कहा, “हमारा विज़न ‘स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स’ को एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (उत्कृष्टता केंद्र) के रूप में विकसित करना और इसे विश्वविद्यालय के चौथे स्तंभ के रूप में स्थापित करना है। लिबरल आर्ट्स प्रोग्राम चुनने वाले छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, हम अनुभवी फैकल्टी को एक साथ लाकर और एक ऐसा माहौल बनाकर अपनी शैक्षणिक नींव को मजबूत कर रहे हैं, जो आलोचनात्मक सोच (क्रिटिकल थिंकिंग), रचनात्मकता और अंतर-विषयक (इंटरडिसिप्लिनरी) सीखने को बढ़ावा देता है।हमारा मानना ​​है कि एक मजबूत लिबरल आर्ट्स शिक्षा दृष्टिकोण को व्यापक बना सकती है, युवाओं को सशक्त कर सकती है और समाज में सार्थक बदलाव ला सकती है।”
प्रो. पी. के. खोसला ने नई सुविधाओं के लिए फैकल्टी को बधाई दी और शिक्षकों को शोध (रिसर्च) पर अधिक ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रो. निष्ठा शुक्ला आनंद ने कहा, “हम ‘स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स’ को देश के अपने तरह के प्रमुख संस्थानों में से एक के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा ध्यान छात्रों को एक ऐसा सर्वांगीण सीखने का अनुभव प्रदान करने पर है, जिसमें शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव, आलोचनात्मक सोच (क्रिटिकल थिंकिंग) और रचनात्मकता का समावेश हो। ये नई सुविधाएं एक ऐसा आकर्षक सीखने का माहौल बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, जो छात्रों को उनके चुने हुए क्षेत्रों में सफल होने के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास से लैस करता है।”

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