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शिमला। हिमाचल सरकार ने ब्यास नदी पर निर्माणाधीन 66 मेगावाट की धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना को अपने अधीन लेने की प्रक्रिया तेज कर दी है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार शाम को सचिवालय में बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं एवं ऊर्जा विभाग को परियोजना के अधिग्रहण के संबंध में न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश हित में परियोजना की लागत की पहली किस्त का भुगतान करने के लिए भी वह तैयार है। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल की संपदा और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। धौलासिद्ध परियोजना का निर्माण सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएनएल) की ओर से किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार एसजेवीएनएल की लुहरी और सुन्नी जलविद्युत परियोजनाओं को भी अपने अधीन लेने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। बैठक में निर्माणाधीन विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने और परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि इनका लाभ प्रदेश के लोगों को जल्द मिल सके। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, बिजली बोर्ड के अध्यक्ष प्रबोध सक्सेना, अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा आरडी नजीम, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक आदित्य नेगी, पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक, निदेशक ऊर्जा शुभ करण सिंह, निदेशक नरेश ठाकुर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सितंबर 2027 तक चालू होगी शोंगटोंग परियोजना
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि 450 मेगावाट क्षमता की शोंगटोंग जलविद्युत परियोजना सितंबर 202 तक पूरी तरह कार्यशील हो जाएगी। तीन टरबाइनों की कमीशनिंग के बाद परियोजना को पूरी क्षमता से चलाया जाएगा। परियोजना से उत्पादित बिजली के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के साथ विद्युत खरीद समझौता किया जाएगा।

काजा तक ट्रांसमिशन लाइन, रंगरिक सौर परियोजना की भी समीक्षा
मुख्यमंत्री ने पूह-समदो और समदो-काजा 66 केवी ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने दोनों लाइनों का काम तेज करने के निर्देश दिए। वहीं, रंगरिक में निर्माणाधीन 2 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना की भी समीक्षा हुई। परियोजना में 1 मेगावाट-घंटा क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित की गई है। मुख्यमंत्री ने बर्फबारी शुरू होने से पहले परियोजना को चालू करने के निर्देश दिए, ताकि सर्दियों में भी क्षेत्र को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलती रहे।

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