शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती मामले में स्पष्ट किया है कि निदेशक (महिला एवं बाल विकास) की ओर से जारी कोई प्रशासनिक स्पष्टीकरण से अभ्यर्थी का हक नहीं छीना जा सकता है। ऐसे प्रशासनिक स्पष्टीकरण से सरकार की ओर से अधिसूचित मूल भर्ती नियमों व दिशा-निर्देशों को बदल या दबा नहीं सकता। अदालत ने अपीलीय प्राधिकरण के 30 मई 2023 के आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को दो बेटियों और कोई बेटा न होने की श्रेणी में 2 अतिरिक्त अंक प्रदान कर पद पर नियुक्ति और सभी परिणामी लाभ दिए जाएं। 6 महीने के भीतर अगर लाभ देने में असफल रहने पर 6 फीसदी वार्षिक दर से साधारण ब्याज देना होगा।
यह मामला वर्ष 2021 में मंडी जिले के ग्राम पंचायत गोपालपुर के आंगनबाड़ी केंद्र मोहिन-1 में सहायिका पद के लिए हुए साक्षात्कार से संबंधित है। साक्षात्कार में चयनित अभ्यर्थी प्रतिवादी चंपा देवी को 25 में से 16 अंक मिले, जबकि याचिकाकर्ता प्रोमिला देवी को 15.50 अंक दिए गए।याचिकाकर्ता के पास केवल दो बेटियां थी और कोई बेटा नहीं था। वर्ष 2016 के संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार ऐसी महिला को 2 अतिरिक्त अंक मिलने चाहिए थे। यदि ये 2 अंक जुड़ते, तो याचिकाकर्ता के कुल अंक 17.50 हो जाते और वह सबसे शीर्ष स्थान पर आ जाती। राज्य सरकार ने तर्क दिया कि 4 जून 2018 के एक प्रशासनिक स्पष्टीकरण के तहत यह 2 अंक केवल उन्हीं परिवारों को देय हैं, जिन्होंने 1 या 2 बेटियों के जन्म के बाद स्थायी परिवार नियोजन अपनाया हो।
