होटलों पर बढ़ते विभागीय शुल्कों की समग्र समीक्षा की मांग
मंत्रियों और विभागाध्यक्षों से जल्द मिलेगा महासंघ का प्रतिनिधिमंडल
शिमला / सोलन:फेडरेशन ऑफ हिमाचल होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन्स (FOHHRA) ने हिमाचल प्रदेश सरकार से होटल संचालकों पर थोपी गई प्रदूषण नियंत्रण संबंधी ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ (Consent to Operate) सहमति शुल्क में भारी बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही महासंघ ने होटल उद्योग पर विभिन्न विभागों द्वारा लगातार बढ़ाए जा रहे शुल्कों और प्रभारों की समग्र समीक्षा करने का भी आग्रह किया है।
150 प्रतिशत तक बढ़ा शुल्क, होटल कारोबारियों में भारी रोष
महासंघ के अध्यक्ष श्री देवेंद्र वर्मा ने बताया कि प्रदेश के होटल संचालकों ने संचालन सहमति शुल्क में हुई अप्रत्याशित वृद्धि पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
श्री वर्मा के अनुसार:
13 कमरों तक और ₹1.5 करोड़ तक की परियोजना लागत वाले छोटे होटलों को पहले 5 वर्षों के लिए ₹72,000 शुल्क देना पड़ता था।
अब इसी अवधि के लिए ₹1,80,000 शुल्क की मांग की जा रही है, जो कि सीधे तौर पर 150 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी है।
इससे छोटे होटलों पर वार्षिक भार ₹14,400 से बढ़कर सीधे ₹36,000 हो गया है।
बड़ी परियोजना लागत और अधिक कमरों वाले होटलों पर भी इसका व्यापक असर पड़ा है।
होटल बंद करने के नोटिस पर चिंता
अध्यक्ष देवेंद्र वर्मा ने कहा कि शुल्क जमा न करने पर कुछ होटल संचालकों को होटल बंद करने के चेतावनी नोटिस मिले हैं, जिससे कारोबारियों और कर्मचारियों में असुरक्षा का माहौल बन गया है। कारोबारी अपनी जीवनभर की पूंजी और ऋण लेकर स्थानीय लोगों को रोजगार देते हैं। ऐसे में विवादित बढ़े हुए शुल्क के कारण कठोर कार्रवाई करने से पहले समीक्षा व सुनवाई होना बेहद जरूरी है।
विभिन्न विभागीय शुल्कों के संयुक्त बोझ से चरमराया उद्योग
महासंघ ने स्पष्ट किया कि वे पर्यावरण संरक्षण का पूरा समर्थन करते हैं, लेकिन शुल्क पारदर्शी और वहनीय होना चाहिए। इसके अलावा, FOHHRA ने पर्यटन पंजीकरण व नवीनीकरण, लिफ्ट अनुमति, अग्निशमन (Fire Safety) स्वीकृति, बिजली दरें तथा अन्य विभागीय प्रभारों के एकसाथ बढ़ते बोझ पर चिंता जताई। हिमाचल में पर्यटन सीजन आधारित (Seasonal) है, जबकि कर्मचारियों के वेतन, बैंक की किस्तें और रख-रखाव का खर्च पूरे साल उठाना पड़ता है।
FOHHRA की मुख्य मांगें:
बढ़ोतरी वापस ली जाए: प्रदूषण सहमति शुल्क में की गई भारी वृद्धि को तुरंत वापस लिया जाए और पुरानी दरें बहाल की जाएं।
कठोर कार्रवाई पर रोक: विवादित बढ़े शुल्क को लेकर होटलों पर की जाने वाली बंद करने की कार्रवाई या दंडात्मक कदमों को तुरंत स्थगित रखा जाए।
संयुक्त समीक्षा और परामर्श: सभी संबंधित विभागों के शुल्कों की एक संयुक्त समीक्षा की जाए और भविष्य में शुल्क बढ़ाने से पहले होटल संघों के साथ चर्चा की जाए।
श्री देवेंद्र वर्मा ने बताया कि FOHHRA का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही संबंधित मंत्रियों, प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों से मुलाकात कर समस्याओं के समयबद्ध समाधान की मांग करेगा।