केलांग | केंद्रीय अल्पसंख्यक एवं संसदीय मामले मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर के बाद पहली बार 71 वर्षों में कोई बौद्ध नेता केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बना है। उन्होंने खुद को अल्पसंख्यकों के अधिकारों का प्रतीक बताते हुए कहा कि अब अल्पसंख्यक मंत्रालय केवल एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि सभी छह अल्पसंख्यक समुदायों मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी के लिए समान रूप से कार्य कर रहे हैं। कांग्रेस शासन में अल्पसंख्यक मंत्रालय का लाभ केवल मुसलमानों तक सीमित था, जबकि अन्य समुदाय योजनाओं से वंचित रहे। अब मोदी सरकार में सभी अल्पसंख्यक समुदायों को बोनस के साथ बजट दिया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूरे हिमाचल के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय की ओर से 200 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 167 करोड़ रुपये की योजनाएं अकेले लाहौल-स्पीति के लिए स्वीकृत हुई हैं। 80 प्रतिशत से अधिक बजट इसी जनजातीय जिले को दिया गया है। रिजिजू ने बताया कि वह पिछले चार दिनों से हिमाचल दौरे पर हैं और इस दौरान लाहौल-स्पीति के दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचकर अनेक परियोजनाओं की आधारशिला रखीं। पहले दिल्ली में बैठकर नीति बनाई जाती थी, अब हम पहाड़ में आकर जनता के बीच नीति ला रहे हैं। बतौर बौद्ध नेता उनका मंत्री बनना पूरे समुदाय के लिए सम्मान की बात है। कहा कि उनका दायित्व है कि हम उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दें, जो दशकों तक उपेक्षित रहे।
लाहौल स्पीति के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सपना देखा नरेंद्र मोदी ने पूरा किया : जयराम ठाकुर
प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत लाहौल में हुए विकास कार्यों के उद्घाटन के मौके पर जनसभा को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2000 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि लाहौल आना मुश्किल है, जाना मुश्किल है। उन्होंने यह भी कहा था कि इस हालात को बदलना होगा। उसके लिए उन्होंने काम शुरु किया। अटल टनल की शुरुआत की। 3300 करोड़ की लागत से इतनी ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी सुरंग बनाने का सिलसिला शुरू हुआ। यह काम बहुत कठिन था लेकिन प्रधानमंत्री की दृढ़ इच्छा शक्ति ने यह काम पूरा करवाया।
