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शिमला। हिमाचल प्रदेश की हिमकेयर योजना में कथित 110 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के मामले में राज्य विजिलेंस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच तेज हो गई है। 98 निजी अस्पतालों से जुड़े मामलों में उपलब्ध दस्तावेजों और प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जांच एजेंसी का फोकस कथित फर्जी क्लेम, संदिग्ध सर्जरी, मरीजों के उपचार संबंधी रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच पर है। सूत्रों के मुताबिक एफआईआर दर्ज होने के बाद अस्पतालों के कंप्यूटर सिस्टम, सर्वर, बिलिंग सॉफ्टवेयर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच की जाएगी।

साथ ही अस्पतालों के ओपीडी और आईपीडी रजिस्टरों और क्लेम रिकॉर्ड का मिलान भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। विजिलेंस ने स्वास्थ्य विभाग से उसकी आंतरिक जांच रिपोर्ट भी मांगी है। विभागीय रिपोर्ट और विजिलेंस की जांच के निष्कर्षों के मिलान के बाद संबंधित अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका तय की जाएगी। यदि किसी स्तर पर नियमों के उल्लंघन या मिलीभगत के प्रमाण मिलते हैं तो विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक कार्रवाई भी संभव है। सूत्रों का कहना है कि जांच का एक प्रमुख पहलू वित्तीय लेनदेन और कथित मनी ट्रेल की पड़ताल भी है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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