शिमला | प्रदेश में सडक़ हादसों को लेकर कैशलेस इलाज की सुविधा को शुरू कर दिया गया है। जो कोई भी व्यक्ति सडक़ दुर्घटना में घायल होता है उसका कैशलेस इलाज अस्पतालों में होगा और सात दिनों के भीतर सवा लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। केंद्र सरकार ने निर्देशों पर सोमवार से हिमाचल प्रदेश में यह सुविधा शुरू कर दी गई है। यदि भारतीय नागरिकता के अलावा किसी दूसरी नागरिकता क व्यक्ति के साथ भी दुर्घटना होती है, तो उसे भी यह वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
राज्य भर में सडक़ सुरक्षा और आपातकालीन आघात देखभाल सेवाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख पहलों की प्रगति का आकलन करने के लिए सोमवार को परिवहन निदेशालय परिवहन भवन शिमला में एक व्यापक समीक्षा सह-संवेदनशीलता बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कालेजों के प्राचार्य और एमएस तथा राज्य नोडल अधिकारी शामिल हुए। इनके अलावा लीड एजेंसी सडक़ सुरक्षा कोष के अधिकारी भी मौजूद थे। अतिरिक्त परिवहन निदेशक एसडी नेगी ने बैठक की अध्यक्षता की।
एंबुलेंस नेटवर्क मैपिंग पर फोकस
एमरजेंसी में स्वास्थ्य सुविधाओं और एंबुलेंस नेटवर्क की मैपिंग पर जोर दिया। बैठक में सडक़ सुरक्षा पहलों के समन्वय और निगरानी के लिए जिला स्तरीय नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का भी आह्वान किया गया।
प्रदेश में साल 2030 तक 50 फीसदी हादसे कम करने का लक्ष्य
प्रतिभागियों ने भारत के सतत विकास लक्ष्यों एसडीजी के अनुरूप 2030 तक सडक़ यातायात मौतों और चोट को 50 फीसदी तक कम करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इसके अतिरिक्त बैठक में सडक़ सुरक्षा पर सर्वोच्च न्यायालय समिति के निर्देशों को लागू करने के महत्त्व को रेखांकित किया गया। विशेष रूप से राज्य में समर्पित ट्रॉमा केयर सेंटरों को मजबूत करने को कहा गया है।
