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शिमला। यूक्रेन में फंसे हिमाचल के बच्चों के वापस लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है। सूचना के अनुसार रविवार को यूक्रेन में फंसे प्रदेश के 32 विद्यार्थी हिमाचल पहुंचे। संबंधित विद्यार्थी यूक्रेन से दिल्ली रोमानिया के रास्ते से पहुंचे हैं। इनमेें जिला शिमला की 2 छात्राएं भी शामिल थीं। दोनों छात्राएं देर शाम दिल्ली से वोल्वो बस के माध्यम से शिमला पहुंचीं। शिमला पहुंचने पर उन्होंने अपने अनुभव सांझा करते हुए बताया कि वे यूक्रेन के वैस्टर्न रीजन में बुकोवेरियन एस्टेट यूनिवर्सिटी में बीएपीएस की चौथे सैमेस्टर की पढ़ाई कर रही हैं लेकिन वहां के हालात इतने खराब नहीं हैं, जितने की ईस्टर्न रीजन में हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और रूस के बीच भले ही लड़ाई चली हुई है लेकिन वैस्टर्न रीजन में इसका प्रभाव नहीं देखा जा रहा है।

एयरपोर्ट तक लाने के लिए बसों में लगाया जा रहा इंडिया का झंडा

यूक्रेन से शिमला लौटी छात्रा कशिश शर्मा और ओशिमा ने बताया कि भारत सरकार के प्रयासों के चलते यूक्रेन में भारत के राजदूत और वहां की सरकार लगातार भारतीय छात्रों को सुरक्षित वापस लाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट तक लाने के लिए बसों में इंडिया का झंडा लगाया जा रहा है। झंडा लगाने के बाद बसों को वहां की सेना भी चैकिंग के लिए नहीं रोक रही है। उसके बाद एयर इंडिया की फ्लाइट से दिल्ली के लिए उड़ान भरी जा रही है। भारत का झंडा देखने के बाद प्राथमिकता के आधार पर छात्रों को निकाला जा रहा है। कशिश ने बताया कि वह ठियोग की है। यूक्रेन में वह एमबीबीएस के चौथे सैमेस्टर की छात्रा है। उन्होंने बताया कि अब उन्हें डिग्री की चिंता है। हालांकि इस बात की खुशी भी है कि वह सकुशल वापस लौट आई है। आशिमा ने बताया कि यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई हिमाचल के निजी काॅलेजों से सस्ती है। जहां वह रह रही थी, वहां हालात ठीक हैं। खुशी इस बात की है कि सकुशल घर लौट आई। वह एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की छात्रा है।

3 छात्र टैक्सी से गए घर

युद्ध ग्रस्त यूक्रेन में बमबारी का खौफ भी चेहरे पर देखा जा सकता है। यूक्रेन से ये छात्र भारतीय एम्बैसी के सहयोग से दिल्ली व मुम्बई पहुंचे। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से सुबह 9 बजे छात्रों को लाने का काम शुरू हुआ। सबसे पहले छात्रों को हिमाचल भवन में लाया गया और नहाने की सुविधा प्रदान की गई। छात्रों को भोजन करवाने के बाद आईएसबीटी से उनके गंतव्यों शिमला, कांगड़ा, चम्बा, ऊना, हमीरपुर व मंडी भेजने की व्यवस्था की गई। सनद रहे कि यूक्रेन में फंसे हिमाचल के छात्रों में से 17 मुम्बई और 15 दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचे थे। इनमें से शिमला के 3 छात्र टैक्सी से घर आ गए। दिल्ली स्थित प्रदेश के आवासीय आयुक्त कार्यालय की ओर से छात्रों को लाने और घर भेजने की उचित व्यवस्था करने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों की टीमें पूरा दिन इस कार्य में लगी रहीं। छात्रों को परिवहन निगम व पर्यटन विकास निगम की बसों में उनके संबंधित स्थानों के लिए भेजा गया। सुबह साढ़े 11 बजे शिमला व ऊना सहित अन्य स्थानों को छात्र भेजे गए।

मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शनिवार को विधानसभा में यूक्रेन से लौटने वाले छात्रों की नि:शुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने की घोषणा की थी। इसके बाद आवासीय आयुक्त कार्यालय की ओर से सभी छात्रों को पहले हिमाचल भवन और फिर उनके गंतव्यों के लिए चलने वाली बस सेवा से यात्रा करने का प्रबंध किया गया।

घर वापसी के लिए 80 हजार किए खर्च

टुटू के नरेश शर्मा की पुत्री श्रुति भी यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। युद्ध छिड़ने के बाद नरेश शर्मा ने बामुश्किल करीब 80 हजार रुपए किराया खर्च कर बेटी की घर वापसी का बंदोबस्त किया। बेटी के घर लौटने के बाद नरेश शर्मा ने राहत की सांस ली है।

भारतीय दूतावास व प्रदेश सरकार ने की मदद

रविवार रात लगभग 8 बजे सोलन जिला निवासी अवंतिका पाल यूक्रेन से अपने वतन पहुंची। भारतीय दूतावास व प्रदेश सरकार ने उन्हें घर पहुंचाने में मदद की। अवंतिका यूक्रेन यूनिवर्सिटी में मेडिकल स्टूडैंट है। उसने बताया कि बहुत से लोग और छात्र कई बकरों में फंसे हुए हैं। अवंतिका ने भारत सरकार से फंसे हुए सभी भारतीयों को निकालने की अपील की है। पिता समशेर पाल ने केंद्र व प्रदेश सरकार का धन्यवाद किया।

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