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शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम ने यात्रियों को बेहतर सुविधा, साफ-सफाई और पारदर्शी व्यवस्था देने के लिए रोड के किनारे ढाबों और खाने-पीने की जगहों पर बसों के ठहराव के लिए नई नीति लागू की है। पहले लंबी दूरी और प्रदेश के अंदर चलने वाली बसों के ठहराव बिना किसी तय नियम के होते थे और सिर्फ समय-समय पर दिए गए निर्देशों पर निर्भर रहते थे। इससे यात्रियों के अनुभव में फर्क पड़ता था। अब नई नीति में साफ-साफ नियम बनाए गए हैं कि ढाबों का चयन, रजिस्ट्रेशन, जांच और समय समय पर समीक्षा कैसे होगी। इसमें यह भी प्रावधान है कि जो ढाबे नियम नहीं मानेंगे, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा और लगातार खराब सेवा देने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। नई नीति में तय किया गया है कि किसी नए ढाबे को तभी रजिस्टर किया जाएगा, जब वह किसी पहले से रजिस्टर ढाबे से कम से कम 25 किलोमीटर दूर हो।

यात्रियों के लिए साफ शौचालय, सुरक्षित पीने का पानी, आरामदायक बैठने की व्यवस्था, गाडिय़ों की सुरक्षित पार्किंग और आसान पहुंच जैसी सुविधाएं जरूरी होंगी। किसी ढाबे को सूची में शामिल करने से पहले समिति मिलकर उसकी जांच करेगी। वार्षिक रजिस्ट्रेशन शुल्क और ठहराव शुल्क भी बढ़ाए गए हैं, जिससे निगम की गैर-ऑपरेशनल आमदनी बढ़ेगी। यात्रियों से सुझाव और शिकायत लेने के लिए हेल्पलाइन शुरू की जाएगी और औचक निरीक्षण भी होंगे। इस नीति से बसों के ठहराव का एक समान और यात्री हितैषी सिस्टम बनेगा, ढाबों में साफ-सफाई और गुणवत्ता को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, और निगम को अतिरिक्त आमदनी मिलेगी। ढाबा नीति के अलावा, एचआरटीसी ने गाडिय़ों की मैकेनिकल जांच फीस, ड्राइविंग टेस्ट फीस और अन्य सेवाओं के शुल्क भी बढ़ाए हैं। निगम का प्रबंधन अलग-अलग तरीकों से आमदनी बढ़ाने और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार कदम उठा रहा है।

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