Spread the love

शिमला: बहुचर्चित फर्जी डिग्री मामले की जांच कर रही हिमाचल पुलिस की एसआईटी (SIT)ने खुलासा किया है कि मानव भारती विवि सोलन ने बड़े पैमाने पर फर्जी डिग्रियां बेचकर अकूत संपति अर्जित की है। मानव भारती चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष राज कुमार राणा की हिमाचल, राजस्थान और अन्य स्थानों में कई चल व अचल संपत्ति है। हिमाचल पुलिस ने राज कुमार राणा के आय के स्त्रोतों की जांच करने का मामला मुख्य आयुक्त आयकर  से उठाया है। राज्य के डीजीपी संजय कुंडू ने आयकर विभाग से चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष की संपति व वित्तीय पहलुओं की जांच करने का अनुरोध किया है।

पुलिस अधीक्षक कानून एवं व्यवस्था खुशहाल शर्मा ने सोमवार को बताया कि मानव भारतीय विवि के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 420, 467, 468 व 120 बी के तहत तीन आपराधिक मामले सोलन के धर्मपुर थाना में दर्ज किए गए हैं। इन मामलों की जांच हिमाचल पुलिस के एक विशेष अन्वेषण दल द्वारा की जा रही है। जांच में पाया गया है कि मानव भारती विश्वविद्यालय ने इसकी स्थापना के बाद से उम्मीदवारों को बड़ी संख्या में फर्जी ड़िग्रियां जारी की और उसकेे बदले उनसे भारी संख्या में पैसे लिए।

उन्होंने कहा कि मानव भारती चैरिटेबल ट्रस्ट के स्वामित्व में मानव भारती विश्वविद्यालय की स्थापना मानव भारती विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) अधिनियम 2009 के अनुसार की गई थी। मानव भारती चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष राज कुमार राणा हैं व उनकी पत्नी ट्रस्ट के न्यासी हैं। इसी ट्रस्ट के तत्वावधान में वर्ष 2013 में माधव विश्वविद्यालय राजस्थान की स्थापना भी की गई थी।

उन्होंने कहा कि जांच में सामने आया कि राज कुमार राणा ने हिमाचल और राजस्थान सहित अन्य स्थानों पर भारी मात्रा में चल व अचल संपत्ति अर्जित की गई है, जिसके लिए  धनराशि फर्जी डिग्री जारी करके प्राप्त की गई है। राणा इस समय आस्ट्रेलिया में है। उन्होंने कहा कि फर्जी डिग्रियों के अतिरिक्त अपराध के वित्तीय पहलुओं की जांच करना जरूरी है। आरोपी की सम्पति, उसके आय के स्त्रोतों इत्यादि की जांच का मामला मुख्य आयुक्त आयकर शिमला से उठाया गया है

You missed