कुल्लू/चम्बा | हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश-भूस्खलन से तबाही का दौर जारी है। बुधवार को चंबा जिले में दो जगह भूस्खलन से भाई-बहन समेत चार लोगों की मौत हो गई है, जबकि दो लापता हैं। भरमौर के होली क्षेत्र के हलूण गांव में नाले में बाढ़ आने से नौ घरों के बहने की सूचना है। हालांकि, प्रशासनिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मणिमहेश यात्रा पर गए करीब 20,000 श्रद्धालु जगह-जगह फंसे हैं। घायल छह श्रद्धालुओं को भरमौर से चंबा मेडिकल कॉलेज में एयरलिफ्ट किया गया है। उधर, रावी नदी उफान पर है और आसपास के घर खाली करवाए गए हैं। बारिश-भूस्खलन के चलते दो एनएच समेत प्रदेश में 582 सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं, जबकि 1155 बिजली ट्रांसफार्मर और 346 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं।
लगातार तीन दिन बारिश के बाद बुधवार को कुल्लू-लाहौल में मौसम साफ रहा। कुल्लू-मनाली हाईवे-तीन के साथ सड़कों व बिजली-पानी की बहाली का काम तेजी से शुरू कर दिया है। मनाली और लाहौल घाटी अभी देश-दुनिया से कटी है। प्रशासन ने कुल्लू से मनाली के अलेऊ तक वामतट सड़क को छोटे वाहनों के लिए बहाल कर दिया है। कुल्लू से मनाली के बीच एनएच को बहाल करना चुनौती है। बागवान चौथे दिन भी सेब को तुड़ान नहीं कर पाए और मंडियों में सन्नाटा पसरा रहा। मनाली व लाहौल में बिजली व इंटरनेट सेवा के साथ दूरसंचार सेवा बंद रही। मनाली में फंसे सैलानियों से परिजनों की बातचीत नहीं हो पा रही है। हालांकि, सभी सैलानी यहां सुरक्षित हैं।
जिले में 100 से अधिक मुख्य व ग्रामीण सड़कें बंद हैं। बंजार से लेकर मनाली व लाहौल तक सैकड़ों गांवों में अंधेरा पसरा है। कुल्लू शहर में तीन दिनों से पानी नहीं आ रहा है। जिला में 80 के करीब योजनाएं प्रभावित हैं।कांगड़ा में नदी-नालों में बाढ़ से पौंग बांध में जलस्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। बुधवार दोपहर को बांध का जलस्तर 1393.61 फीट रिकॉर्ड किया गया, जो खतरे के निशान से तीन फीट ज्यादा है। वहीं, बांध से छोड़े जा रहे पानी के कारण इंदौरा और फतेहपुर क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। एनडीआरएफ की टीम ने बुधवार को 15 लोगों को रेस्क्यू किया।


