शिमला। हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस और कोविड-19 के विषय मे चलाया जा रहा जागरूकता अभियान पूरी तरह से फेल नजर आ रहा है। जिसका जीवित उदहारण पिछले कल काजा के प्रवेश द्वार पर महिलाओं द्वारा सही जानकारी के अभाव में प्रदेश सरकार के मंत्री रामलाल मार्कण्डे को रोकना है। असल मे हिमाचल प्रदेश के अंदर कोई भी व्यक्ति किसी भी जिले में प्रवेश कर सकता है। उसे 14 दिन कोरंटिन रहने की आवश्यकता नही है। प्रदेश सरकार का प्रचार तंत्र शायद यह बाद लोगों तक पहुंचने में नाकाम रहा है। इसी के चलते गांवों में तरह तरह की अफवाहें और धारणाएं बन गई है। जिसका शिकार स्वयं सरकार के कैबिनेट मंत्री को होना पड़ा है। प्रदेश सरकार जनता को कोविड 19 के बारे में बताने के लिए और सही जानकारी लोगों तक पहुंचे इसके लिए लाखों रुपया लोक सम्पर्क एवं सूचना विभाग हिमाचल प्रदेश के माद्यम से विज्ञापनों पर खर्च कर रही है।
लेकिन यह विज्ञापन लोगों तक नही पहुंच पा रहे है। क्योंकि कुछ एक अधिकारी जो विभाग में बैठे है उन्हें मात्र अखबार और चुनिंदा टीवी चैनल ही विज्ञापन का जरिया दिख रहे है। जबकि आज की परिस्थितियों में अखबार और टीवी से तेज माद्यम वेब मीडिया है। जिस पर विभाग के अधिकारी प्रचार करने में शर्मा रहे है। जबकि केबिनेट मंत्री का यह वीडियो इसी माध्यम से ही लोगो मे प्रसारित हो रहा है। सरकार के प्रचार तंत्र की यह कमजोरी कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती है। इस लिए प्रदेश सरकार के निर्णय और कोविड-19 के विषय मे सही जानकारी जनता तक पहुंचना जरूरी है।
