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चेवा:पंचायत चुनाव में हार-जीत तो लोकतंत्र की एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन कुछ उम्मीदवार अपने शालीन व्यवहार और सकारात्मक सोच से चुनावी नतीजों से कहीं बड़ी जीत हासिल कर लेते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है चेवा पंचायत में बेहद करीबी अंतर से प्रधान पद का चुनाव हारने वाले मुकेश ठाकुर ‘रॉकी’ ने, जो इन दिनों अपनी खेल भावना और बड़प्पन के कारण पूरी पंचायत में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
मतदाताओं के नाम जारी किया भावुक आभार संदेश
चुनाव परिणाम घोषित होने के ठीक दो दिन बाद, मुकेश ठाकुर ‘रॉकी’ ने जनता के नाम एक बेहद भावुक और गरिमापूर्ण आभार संदेश जारी किया है। सोशल मीडिया और पोस्टरों के माध्यम से सामने आए इस संदेश ने आम जनता के दिलों को छू लिया है। अपने इस संदेश में रॉकी ने न केवल अपनी जीत के लिए दिन-रात एक करने वाले समर्थकों का आभार जताया, बल्कि उन मतदाताओं का भी सहर्ष धन्यवाद किया जिन्होंने उनके पक्ष में मतदान नहीं किया था। उनके इस सौहार्दपूर्ण कदम की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।
“चुनाव हार सकता हूँ, लेकिन जनता से दिलों का रिश्ता नहीं”
रॉकी ने अपने संदेश में बेहद परिपक्वता दिखाते हुए लिखा है:
“हार-जीत तो चुनाव का एक हिस्सा मात्र है, लेकिन चेवा पंचायत की जनता के साथ मेरा रिश्ता केवल वोटों का नहीं, बल्कि दिलों का है। मैं स्वयं को इस माटी का बेटा मानता हूँ। चुनाव परिणाम चाहे जो भी रहे हों, जनता से मिला असीम प्यार और विश्वास ही मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।”
उन्होंने आगे विश्वास दिलाया कि वे हमेशा की तरह क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे। उन्होंने साफ किया कि जनता की सेवा करने का उनका संकल्प न तो कमजोर हुआ है और न ही कभी खत्म होगा।
दरवाजे हमेशा खुले रहेंगे, सेवा का संकल्प अटल
पराजित होने के बावजूद रॉकी ने जनता को भरोसा दिलाया है कि चेवा पंचायत के लोगों के लिए उनके घर के दरवाजे पहले की तरह चौबीसों घंटे खुले रहेंगे। विकास कार्यों और जनसेवा को लेकर उन्होंने कहा कि जो भी कार्य उनके सामर्थ्य और क्षमता में होगा, उसे वे बिना किसी भेदभाव के पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करने का प्रयास करते रहेंगे।
कांटे के मुकाबले में बेहद चर्चित रहा चेवा का चुनाव
गौरतलब है कि चेवा पंचायत का यह चुनाव शुरू से ही पूरे क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मियों का केंद्र बना हुआ था। प्रचार के दौरान यहां जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और मतदान के बाद जब नतीजे आए, तो मुकाबला बेहद कांटे का और रोचक साबित हुआ। बेहद मामूली अंतर से भले ही रॉकी प्रधान पद की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन चुनाव के बाद उनके इस सकारात्मक रुख ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति में हारकर भी लोगों का दिल कैसे जीता जाता है।

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