शिमला। अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव का सोमवार को राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने शुभारंभ किया। पहली सांस्कृतिक संध्या पर सूफी और बॉलीवुड गायक शबाब साबरी ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। वहीं प्रथम सांस्कृतिक संध्या में 4 से 7 बजे तक हिमाचली गायकों ने अपनी प्रस्तुतियों से समा बांधा। इस दौरान राजेंद्र कुमार, विक्की और हीरा ठाकुर, दीक्षिता बरागटा, पविंदर सिंह, गोपाल सिंह मानटा, शीतल बागरी, शिव राम बागरी, सीता राम बागरी, नेहा, बलदेव सिंह, रोशनी शर्मा, राजीव नेगी, सोहन सिंह, चमन कौशल, विनोद कुमार गंधर्व, जयवती, लवली वालिया, आशीष मोहन, संदीप कुमार, तारा कमल, गौरी शंकर, दिव्यांशु, निधि वालिया, रवि कंवर व हिमांशी तनवर ने अपनी कला के गायकी के जरिए दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।
मालरोड पर छम्म नृत्य ने मोहा मन
राजधानी के मालरोड पर अंतराष्ट्रीय ग्रीष्मोत्सव में आयोजित छम्म नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोहा। इस भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय निवासी शामिल हुए। उत्तराखंड के कलाकारों के ऊर्जावान प्रदर्शन ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान रंगीन पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने अपनी प्राचीन कला का प्रदर्शन किया। ढोल-नगाड़ों की थाप और मधुर संगीत ने माहौल को जीवंत बनाया। नृत्य की हर मुद्रा में कलाकारों का समर्पण दिखा। दर्शकों ने तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया। कई पर्यटकों ने इस यादगार पल को अपने कैमरों में कैद किया। यह नृत्य हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत दर्शाता है। छम्म नृत्य एक प्राचीन बौद्ध लामा नृत्य शैली है। इसमें कलाकार विशेष मुखौटे पहनकर धार्मिक कथाएं मंचित करते हैं। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
