शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला एयरपोर्ट जाने वाली मुख्य सडक़ के दोनों किनारों पर हो रहे अवैध निर्माणों और अतिक्रमण पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने इस मामले में लोक निर्माण विभाग की कथित लापरवाही को देखते हुए दर्ज जनहित याचिका कि सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार को सभी अवैध कब्जों को हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ के समक्ष इस जनहित याचिका पर सुनवाई हुई । इस जनहित याचिका की शुरुआत हाई कोर्ट को मिले एक शिकायती पत्र के बाद हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि शिमला एयरपोर्ट की तरफ जाने वाली सडक़ के दोनों तरफ बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण हो रहे हैं और लोक निर्माण विभाग इस पर पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी और यह भी साफ करने को कहा था कि सडक़ के केंद्र से निजी निर्माण के लिए न्यूनतम दूरी कितनी तय है।
लोक निर्माण विभाग के शिमला चतुर्थ सर्किल के अधीक्षण अभियंता द्वारा कोर्ट में ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई, जिसमें दो प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण की बात सामने आई है। फायल-रामपुरी वाया मथोली मार्ग के इस खंड पर तीन अवैध कब्जे पाए गए थे, जिनमें से दो को कब्जाधारियों ने खुद ही हटा लिया है। हालांकि, एक व्यक्ति रूप राम द्वारा कब्जा न हटाने पर विभाग ने उसे 19 सितंबर, 2026 को नोटिस तामील कराया है। जैथिया देवी से रामपुरी मार्ग के इस मार्ग पर पांच अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इनमें से मैसर्स शांति और रूप राम ने अपने खर्च पर आंशिक रूप से कब्जे हटाए हैं, जबकि तीन अन्य कब्जाधारियों ने अपनी मौजूदगी में दोबारा पैमाइश की मांग करते हुए कब्जा नहीं हटाया है। इन्हें भी विभाग द्वारा नोटिस जारी कर दिए हैं। खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई से पहले सभी बचे हुए अतिक्रमणों को हटाने के लिए प्रभावी और निर्णायक कदम उठाए जाएं। जनहित याचिका की अगली सुनवाई सात दिसंबर, 2026 को होगी।
कसौली में अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट सख्त
वुड विला में पेड़ों की कटाई पर जिला प्रशासन को तुरंत जांच के आदेश
कसौली में चल रहे अवैध निर्माण और सदियों पुराने चीड़/देवदार के पेड़ों की कटाई पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका दर्ज की है और जिला प्रशासन को निर्माण स्थल पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने जारी किए। हाई कोर्ट ने यह कार्रवाई कसौली के लोअर मॉल स्थित फिरोजी विला की निवासी और वरिष्ठ नागरिक द्वारा भेजी गई एक ई-मेल शिकायत पर की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनके घर के बगल में स्थित संपत्ति वुडविला में भारी मशीनों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर अवैध खुदाई की जा रही है। इस खुदाई से कई सदियों पुराने चीड़ के पेड़ों को अवैध रूप से काट दिया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, अभी हाल ही में 27 सितंबर, 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे भारी मशीनों से चार बड़े चीड़ के पेड़ों को काटा गया और उनकी जड़ों को पूरी तरह खोद दिया गया। हाई कोर्ट ने उपमंडलीय मजिस्ट्रेट कसौली को निर्देश दिया है कि वे तुरंत मौके पर जाकर औचक निरीक्षण करें। हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 अक्तूबर तय की है, तब तक प्रशासन को अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी।
