Spread the love

शिमला | हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम के रिटायर कर्मचारियों को अब तक पेंशन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। बुधवार को भी इन सेवानिवृत कर्मियों की पेंशन उनके खाते में नहीं आई। बताया जाता है कि सरकार से जो वांछित धनराशि एचआरटीसी को चाहिए थी वो नहीं मिल पाई है जिसके चलते इन रिटायर कर्मियों की दीपावली भी फीकी रही और अब तक इनको पेंशन नहीं आई है। इन सेवानिवृत कर्मचारियों को 6 नवंबर को भी पेंशन का इंतजार ही रहा जिसके बाद इनकी नाराजगी काफी ज्यादा बढ़ गई है। निगम ने भैयादूज व दीपावली के मौके पर रिकॉर्ड कमाई तो की लेकिन अपने सेवानिवृत कर्मियों को पेंशन नहीं दे पाया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि निगम के पास पैसा नहीं है। इस महीने एचआरटीसी को सरकार से जो पैसा आना चाहिए था वो पूरी तरह से नहीं मिल पाया। सरकार ने एचआरटीसी को पहले 60 करोड़ की ग्रांट जारी की।

निगम ने 5 करोड़ की अतिरिक्त ग्रांट मांगी। इसमें से केवल 3 करोड़ ही जारी किया गया। निगम प्रबंधन ने 2 करोड़ का अतिरिक्त बजट मांगा है। कम राशि मिलने पर निगम केवल वेतन का ही खर्चा निकाल पाया और निगम ने अपने कर्मचारियों को वेतन की अदायगी पहले ही कर दी। राज्य सरकार ने सभी पेंशनरों को दीपावली से पहले 28 तारीख को ही पेंशन देने का वायदा किया था लेकिन 28 अक्टूबर तो दूर 6 नवंबर को भी पेंशन नहीं मिल पाई है। रिटायर कर्मियों ने इसपर नाराजगी जताई है और वो इस आलम में निगम के खिलाफ सडक़ों पर उतरने की तैयारी में है। इनमें लगातार रोष बढ़ रहा है और हर महीने इस तरह के व्यवहार से यह लोग खिन्न हंै।

निगम प्रबंधन के अनुसार हर महीने 45 करोड़ रुपए वेतन पर खर्च होता है। इसके अलावा 21 करोड़ पेंशन पर जाता है। एचआरटीसी में 7 हजार पेंशनर हैं। 45 करोड़ का खर्च डीजल पर होता है। 8 करोड़ की किश्त कलपूर्जों की खरीद पर दी जाती है। निगम के पास जो पैसा था और उसने जो कमाई पिछले महीने की है उससे टायर का खर्चा, तेल का खर्चा और स्पेयर पार्ट आदि का खर्चा हो गया है जिस वजह से उसके पास पैसा नहीं बचा। ऐसे में पेंशनरों को अब पेंशन देने के लाले पड़ गए हैं। निगम ने सरकार से 65 से 70 करोड़ रूपए की डिमांड की थी क्योंकि निगम सरकार के लिए सामाजिक सरोकार के दायित्व का निर्वहन कर रहा है।

उसे सरकार से सालाना 900 करोड़ रुपए की राशि इन सेवाओं की एवज में चाहिए मगर सरकार उसे 700 करोड़ देती है और उसमें भी कटौती की जा रही है। एचआरटीसी ने अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं जिसका थोड़ा असर दिख रहा है परंतु उसका घाटा काफी ज्यादा है। कर्मचारियों का वेतन व भत्ते सरकार की तर्ज पर है वहीं पेंशनरों के लिए ओपीएस लागू कर रखा है और साथ ही सरकार की रियायती सेवाओं का दायित्व भी निगम उठा रहा है। इनकी एवज में वह सरकार से पैसा मांगते हंै जो पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रहा है। सरकार की रियायती सेवाओं की ही बात करें तो 50 लाख रूपए का रोजाना का नुकसान हो रहा है जो रविवार या अवकाश वाले दिन में कम होता है।

इसके अलावा अभी कर्मचारियों का नाइट ओवर टाइम का पैसा भी लिया जाना है। यह राशि लगभग 97 करोड़ रूपए की बनती है जिसे लेकर मुख्यमंत्री ने एलान कर रखा है। सरकार इस पैसे को देगी मगर अभी यह राशि नहीं मिली है। इसके लिए भी प्रबंधन ने पत्र लिखा है जिसपर कोई जवाब नहीं आया। यदि एक-दो महीने ऐसे ही निकल गए तो मामला बिगड़ सकता है क्योंकि कर्मचारी पिछले 56 महीने से नाइट ओवर टाइम का इंतजार कर रहे हैं। एचआरटीसी के एमडी रोहन चंद ठाकुर का कहना है कि उन्होंने पेंशन का इंतजाम करने के लिए सरकार को लिखा है लेकिन अभी फाइल सचिवालय के गलियारों में ही है। इसपर किसी तरह के आदेश नहीं हुए हैं। सरकार ने हाल ही में तीन करोड़ दिए थे मगर उन्हें पांच करोड़ रूपए की जरूरत है तभी पेंशन रिलीज होगी क्योंकि इसका कुल खर्चा 21 करोड़ है। इस बार एचआरटीसी अपने खाते से भी 6 करोड़ रूपए तक इसमें दे रही है मगर फिर भी पैसा पूरा नहीं हो पाया है। जैसे ही धनराशि का इंतजाम होगा पेंशन रिलीज कर दी जाएगी।

You missed