मौसम और बीमारियों की मार से उत्पादन कम होने के कारण हिमाचली सेब जूस का संकट लाखों उपभोक्ताओं को झेलना पड़ सकता है। सेब सीजन में एचपीएमसी के संयंत्रों में साल भर की जरूरत का जूस तैयार किया जाता है लेकिन इस बार सेब उत्पादन पिछले साल के मुकाबले पचास फीसदी कम है। इन संयंत्रों में सी-ग्रेड का सेब खरीदकर जूस तैयार किया जाता है। सीजन में खरीद केंद्रों में सेब कम पहुंच रहा है।
सरकारी उपक्रम एचपीएमसी को सीजन में जरूरत के अनुसार सेब नहीं मिल रहा है। निगम को अपने संयंत्रों को पूरी क्षमता के अनुसार चलाने के लिए हर रोज कम से कम 16 ट्रक यानी 160 मीट्रिक टन सेब की जरूरत रहती है। सीजन तेजी पर है लेकिन जूस बनाने के लिए रोज 2 से 4 ट्रक ही पहुंच रहे हैं। यही कारण है कि इन संयंत्रों का पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं किया जा सका है।
मंडियों में दागी सेब भी पहुंच रहा बिकने
सेब की पैदावार कम होने के कारण इस बार दागी सेब भी साठ से अस्सी रुपये किलो तक बिक रहा है। जबकि सरकार ने साफ कह रखा है कि मंडी मध्यस्थता योजना में दागी, पक्षियों के खाये और बीमारी वाला सेब नहीं खरीदा जाएगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1995-96 में प्रदेश में सेब की पैदावार कम होने के कारण एचपीएमसी को जूस के लिए जरूरत का सेब कश्मीर से खरीदना पड़ा था। तब जाकर संयंत्रों में साल भर के लिए जूस का उत्पादन हो पाया था।
एचपीएमसी के महाप्रबंधक डॉ. भुवन शर्मा ने बताया कि सेब सीजन में संयंत्रों की जरूरत के अनुसार सेब नहीं मिल रहा है। निचले इलाकों का सेब खत्म है। ऊंचाई वाले इलाकों से कितना सेब आता है, इस पर संयंत्रों की जरूरत टिकी है। हर रोज 160 मीट्रिक टन सेब की जरूरत है।
