Spread the love
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने किरायेदारी विवाद में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि मकान मालिक की बोनाफाइड आवश्यकता का निर्धारण बेदखली याचिका दायर किए जाने के समय मौजूद परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए। मुकदमे के लंबा खिंचने के दौरान परिस्थितियों में बदलाव होने मात्र से उस समय की वास्तविक जरूरत समाप्त नहीं मानी जा सकती।न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज ने शिमला के लोअर बाजार स्थित करीब 360 वर्गफुट की दुकान को खाली कराने के मामले में किरायेदार की समीक्षा याचिका खारिज करते हुए रेंट कंट्रोलर और अपीलीय प्राधिकारी के आदेशों को बरकरार रखा।
मामले में मकान मालिक ने 1989 में दुकान खरीदी थी। वर्ष 2017 में बेदखली याचिका दायर करते हुए किराया बकाया होने और निजी उपयोग की वास्तविक जरूरत को आधार बनाया गया था। मकान मालिक और उनके बेटे ने दुकान में मरीजों की सुविधा के लिए एक्स-रे मशीन लगाने की आवश्यकता बताई थी। रेंट कंट्रोलर ने 20 अक्टूबर 2021 को बेदखली का आदेश दिया, जिसे अपीलीय प्राधिकारी ने 13 अक्टूबर 2023 को बरकरार रखा।
हाईकोर्ट में किरायेदार ने दलील दी कि कार्यवाही के दौरान मकान मालिक दंपती की मृत्यु हो चुकी है और वारिसों के पास पर्याप्त जगह उपलब्ध है। कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि मुकदमे में देरी से याचिका दायर करते समय मौजूद मकान मालिक के अधिकार प्रभावित नहीं हो सकते। मृत्यु के बाद भी कानूनी वारिस बेदखली आदेश के तहत संपत्ति खाली कराने के हकदार रहेंगे। साथ ही संपत्ति का उपयोग किस तरह करना है, यह तय करना मकान मालिक का अधिकार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed