शिमला। हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी यानी एचपीएनएलयू के तीसरे दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने नशे से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए कांगड़ा और मंडी में दो नई अदालतें खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के लिए अदालतें स्थापित होने से नशे से जुड़े अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री रविवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ज्ञान पथ सभागार में आयोजित एचपीएनएलयू के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि शामिल हुए। इस दौरान स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और पीएचडी शोधार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जबकि शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 16 गोल्ड मेडल दिए गए। समारोह में कानून के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए तीन न्यायिक हस्तियों को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से भी सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने स्नातक होने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दी जा रही है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि एचपीएनएलयू आने वाले समय में शोध और कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट संस्थान के रूप में उभरेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी कानूनी शिक्षा का उपयोग समाज और जनसेवा के लिए करने का आह्वान किया। समारोह में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना, त्रिपुरा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान को मानद डॉक्टर ऑफ लॉज की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्हें कानून और न्याय के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। दीक्षांत समारोह में बीए एलएलबी ऑनर्स, बीबीए एलएलबी ऑनर्स और एलएलएम पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं। इसके अलावा कानून में पीएचडी पूरी करने वाले शोधार्थियों को भी उपाधियां प्रदान की गईं। स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को कुल 16 गोल्ड मेडल प्रदान किए गए।
होनहार विद्यार्थियों को फाउंडर चांसलर फेलोशिप पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। समारोह की शुरुआत अकादमिक जुलूस के साथ हुई। एचपीएनएलयू की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने स्वागत संबोधन दिया और विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने संस्थान की शैक्षणिक यात्रा और उपलब्धियों का विवरण रखा। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं एचपीएनएलयू के चांसलर जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया ने विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एवं एचपीएनएलयू के विजिटर जस्टिस एमएम सुंदरेश ने दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की और दीक्षांत भाषण दिया।
उन्होंने कहा कि कानून के विद्यार्थियों को केवल कानूनी प्रावधानों की व्याख्या करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज को बेहतर बनाने में भी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने विधि पेशेवरों को सामाजिक अभियंता, सामाजिक वास्तुकार और सामाजिक चिकित्सक के रूप में कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि न्याय की प्रभावी समझ के लिए कानून के साथ-साथ सामाजिक परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक समस्याओं को समझना भी जरूरी है। जस्टिस सुंदरेश ने कानूनी पेशे पर एआई के संभावित प्रभावों का उल्लेख करते हुए तकनीकी बदलावों के बीच वकीलों की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा की।
