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शिमला | हिमाचल सरकार द्वारा हाल ही में बनाए गए नए कर्मचारी अधिनियम से कांट्रेक्ट अवधि की पेंशन पर असर नहीं होगा। प्रारंभिक शिक्षा विभाग की ओर से 27 फरवरी, 2025 को पारित किए गए एक आर्डर से यह साफ हो गया है। इस आर्डर में शीला देवी केस की जजमेंट पर वित्त विभाग द्वारा 10 जून, 2024 को जारी किए गए ऑफिस मेमोरेंडम को अपहोल्ड किया गया है। हालांकि कांट्रेक्ट अवधि को पेंशन के अलावा वरिष्ठता, इन्क्रीमेंट या प्रोमोशन के लिए काउंट नहीं किया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक ने विपन कुमार बनाम स्टेट ऑफ हिमाचल मामले में एक ऑर्डर पारित किया है। इसी केस में बंत राम एंड अदर बनाम राज्य सरकार और नारायण दत्त शर्मा बनाम राज्य सरकार के साथ-साथ शीला देवी बनाम स्टेट ऑफ एचपी जैसे मामलों का हवाला भी दिया गया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक इस आर्डर में कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने शीला देवी के केस में स्पष्ट किया है कि कांट्रेक्ट की अवधि को यदि वह बिना ब्रेक रेगुलर सेवा में कन्वर्ट हुई है, तो सिर्फ पेंशन के लिए ही गिना जाएगा।

इसलिए टीजीटी शिक्षकों द्वारा किए गए सीनियोरिटी और इन्क्रीमेंट के क्लेम को खारिज किया जाता है। उन्होंने कहा है कि शीला देवी जजमेंट के आधार पर ही जगदीश चंद बनाम हिमाचल सरकार के मामले में भी इसी जजमेंट को दोबारा से कोट किया गया है। इसलिए नियुक्ति की तिथि से सेवा लाभ मांग रहे टीजीटी शिक्षकों को सिर्फ इसका लाभ सीसीएस पेंशन रूल्स 1972 के तहत पेंशन देने के लिए ही दिया जाएगा और इससे संबंधित एंट्री इनकी सर्विस बुक में की जाएगी। इस आर्डर के आधार पर अब प्रारंभिक शिक्षा विभाग कोर्ट में भी रिप्लाई दायर करेगा। इसी ऑर्डर में यह कहा गया है कि शीला देवी जजमेंट के आधार पर वित्त विभाग के पेंशन विंग ने 10 जून, 2024 को एक कार्यालय आदेश जारी किया था, जिसमें रेगुलराइजेशन पॉलिसी में ही अनुबंध की अवधि को पेंशन लाभ के लिए गिने जाने की व्यवस्था की थी। इसी व्यवस्था के तहत टीजीटी को भी लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने एम्पलाइज एक्ट 2024 के आधार पर 12 दिसंबर, 2003 से 20 फरवरी 2025 तक मिले सीनियोरिटी के लाभ को रिकवरी में डाल दिया है और इस अवधि के बीच किसी भी कोर्ट या अन्य माध्यम से दिए गए आदेशों को भी रद्द कर दिया है। हालांकि 27 फरवरी, 2025 को वित्त विभाग के 2024 के ऑर्डर के आधार पर पेंशन लाभ देने की बात कही गई है। इसका अर्थ यह हुआ कि कर्मचारी अधिनियम से पेंशन प्रभावित नहीं होगी।

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