मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सीआईआई द्वारा ‘एचपी इकोनॉमिक समिट- गेटिंग द ग्रोथ बैक’ पर आयोजित एक वेबीनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश औद्योगिक निवेश नीति के तहत औद्योगीकरण को बढ़ावा देने, इसे और अधिक प्रभावशाली व उद्योग अनुकूल बनाने के लिए आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान कर रहा है।
सीएम ने कहा कि कोरोना महामारी ने विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। इससे ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट की सफलता के उपरांत राज्य सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य भी प्रभावित हुए हैं। हालांकि अर्थव्यवस्था सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है, फिर भी सरकार इसे पुनर्जीवित करने और ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में निर्धारित निवेश लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाऊन में मजदूरों के राज्य से बाहर चले जाने के कारण राज्य में उद्योग क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य में लगभग 3636 कोरोना मामलों में से 800 मामले राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों से सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़कों के फोरलेन पर काम में तेजी लाने का प्रयास किया जाएगा। बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र में रेलवे कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार से मामला उठाया जाएगा।
उद्योगपति सुकेत सिंघल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को देश के फल राज्य के रूप में जाना जाता है जहां फल प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि उपज का मूल्यवर्धन सुनिश्चित करने के लिए सहकारी समितियों का गठन किया जाना चाहिए। इस अवसर पर निदेशक उद्योग हंस राज शर्मा, उद्योगपति हरीश अग्रवाल, संजय खुराना, बिनोद, राजेन्द्र गुलेरिया, अनिल सहगल, राजीव अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
