अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान को लेकर प्रदेश के अनेक साहित्यकारों का मानना है कि हिंदी को और अधिक लोकप्रिय बनाने यह एक अनूठी पहल है। जिसको लेकर साहित्यकार व कवियों ने अमर उजाना के हिंदी है हम अभियान की खूब तारीफ की है।
अमर उजाला की पहल ने हर आयु वर्ग के पाठकों को किया आकर्षित: विजय विशाल
साहित्यकार विजय विशाल का कहना है कि अमर उजाला की इस पहल ने केवल समाज के हर आयुवर्ग के पाठक को आकर्षित किया है बल्कि इस बहाने उनके भीतर छुपी प्रतिभा भी सामने आ रही है। इससे बच्चों में कविता व कहानी पढ़ने की रुचि बढ़ रही है। ताकि उन्हें पढ़ कर वीडियो बनाये जा सकें। इसी तरह गुजरे दिनों की बातें हुईं, लोकगीत, लोककथाओं व हास्य से भरी गप्पों के दिन भी बहुरेंगे।
हिंदी भाषा का है अपना ही महत्व: पवन चौहान
प्रदेश के प्रसिद्ध बाल कथा लेखक पवन चौहान इस मुहिम से बहुत उत्साहित हैं। अपने आस पड़ोस के बच्चों में इस अभियान के पश्चात पठन-पाठन के प्रति बढ़ती रुचि को देखकर वे काफी उत्साहित हैं। उनका मानना है कि हिंदी को अपने लेखा-जोखा से लेकर व्यवहार में ईमानदारी से लाने की जरूरत है। उनके अनुसार देशभर में इतनी सारी भाषाओं के बावजूद हिंदी का अपना महत्व है। चाहे यह भारत की राष्ट्रभाषा न सही लेकिन भारत की पहचान हिंदी से ही है। हिंदी का अपना एक समृद्ध शब्दकोश है। यह जनमानस की भाषा है। विश्व साहित्य में हिंदी अपना एक विशेष स्थान रखती है। इसका दुनिया भर में अपना पाठक वर्ग है। इस बात का गवाह विश्व की बहुत सारी भाषाओं के साहित्य का हिंदी में अनुवाद है जो आज भी निरंतर जारी है। बाकी बात यही है कि हिंदी के प्रति लोगों की जागरूकता के लिए कुछ विशेष दिवस मनाने भर से काम नहीं चलेगा। इसे हमें अपने लेखा-जोखा से लेकर व्यवहार में ईमानदारी से लाने के लिए कार्य करना होगा।
ऐसे प्रयास हिंदी भाषा को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण: सुरेश उपाध्याय
अपनी पेशेगत मजबूरियों के चलते छात्रों को अंग्रेजी पढ़ाने वाले प्रध्यापक सुरेश उपाध्याय मूलत: हिंदी में कविताएं लिखते हैं। एक कवि के रूप में अमर उजाला की इस हिंदी हैं हम पहल से बड़े खुश हैं। उनका मानना है कि ऐसे प्रयास हिंदी को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि इस अभियान में बच्चों से लेकर समाज के हर उम्र के लोगों को आकर्षित करने की क्षमता है।
हिंदी भाषा पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने में सहायक: विनोद कुमार
ऐसे ही एक और कवि हैं विनोद कुमार, जो पढ़ाते अर्थशास्त्र मगर हिंदी में कविताएं लिखना उनका शौक हैं। हिंदी के बारे में कहते हैं कि राष्ट्रभाषा न होते हुए भी हिंदी पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोए हुए है। विविधताओं से भरे इस राष्ट्र में जहां अलग-अलग क्षेत्र में भिन्न-भिन्न बोलियों व भाषाओं का प्रयोग होता है, वहीं हिंदी भारतीयता को प्रकट करती है। हालांकि विनोद का मानना है कि देश के कई भागों में हिंदी का प्रयोग बोलचाल में नहीं होता किंतु सच यही है कि हिंदी पूरे देश में समझी जाती है। इस लिहाज से अमर उजाला की हिंदी हैं हम मुहिम महत्वपूर्ण है।
