रामपुर बुशहर | हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे चुके वीरभद्र सिंह का चतुर्वार्षिक श्राद्ध मंगलवार को रामपुर के पदम महल परिसर में हुआ। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए हजारों लोगों ने श्रद्धांजलि देकर उन्हें याद किया। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल, कैबिनेट मंत्रियों, विधायकों समेत प्रदेश के कोने-कोने से आए उनके समर्थकों ने रामपुर पहुंचकर उन्हें याद किया। सुबह से लेकर देर शाम तक उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। खराब मौसम की वजह से सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू रामपुर नहीं जा पाए। उनकी पत्नी विधायक कमलेश ठाकुर ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। चतुवार्षिक श्राद्ध को लेकर सुबह 6:00 बजे से हल्के वाहनों को बजीर बावड़ी से वाया झाकड़ी होकर भेजा गया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्र से काफी संख्या में लोग आए और पूर्व मुख्यमंत्री को श्रद्धांजलि देकर चले गए। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आईं महिलाओं ने नम आखों से वीरभद्र को श्रद्धांजलि देकर उन्हें नमन किया। पुलिस ने सुरक्षा को लेकर पुख्ता प्रबंध किए थे।
वीरभद्र एक महान राजनेता, दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता और जनता के सच्चे सेवक थे: राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि वीरभद्र सिंह महान राजनेता, दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता और जनता के सच्चे सेवक थे। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए जो योगदान दिया, वह आज भी प्रदेशवासियों के हृदय में अमिट रूप से अंकित है। उनका जनसेवा से जुड़ा जीवन भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। वीरभद्र सिंह ने धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाकर हिमाचल की संस्कृति और आस्था की रक्षा के लिए जो कदम उठाया, वह उनकी देवभूमि के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह से भी मिले।
