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देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मशहूर लोक कलाकार विद्यानंद सरैक को सोमवार शाम को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित  किया. विद्यानंद सरैक चार वर्ष की उम्र से ही हिमाचली लोक संस्कृति व ट्रेडिशनल फोक म्यूजिक की विभिन्न विधाओं को संजोए हुए देश-विदेश में अनेक मंचों पर हिमाचली संस्कृति की छाप छोड़ चुके हैं.

लोक संगीत के क्षेत्र में सिरमौर जिले से ताल्लुक रखने वाले मशहूर लोक कलाकार विद्यानंद सरैक को आज शाम देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया. इस पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद विद्यानंद सरैक ने ये पुरस्कार हासिल कर विद्यानंद सरैक ने हिमाचल प्रदेश का मान बढ़ाया है.

दरअसल 26 जुलाई 1941 में जन्मे लोक कलाकार विद्यानंद सरैक सिरमौर जिले के उपमंडल राजगढ़ के देवठी मझगांव के रहने वाले हैं. लोक संस्कृति के संरक्षक विद्यानंद सरैक को इससे पहले राष्ट्रीय संगीत एवं नाट्य अकादमी द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है. बता दें कि विद्यानंद सरैक चार वर्ष की उम्र से ही हिमाचली लोक संस्कृति व ट्रेडिशनल फोक म्यूजिक की विभिन्न विधाओं को संजोए हुए देश-विदेश में अनेक मंचों पर हिमाचली संस्कृति की छाप छोड़ चुके हैं. उन्होंने हिमाचली संस्कृति व लोक विद्याओं पर किताबें लिखी हैं और सांस्कृतिक ध्रुव धरोहरों पर गहन अध्ययन भी किया है.

विद्यानंद सरैक को इससे पहले भी कई प्रदेशों में व संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है, जिनमें पंजाब कला शास्त्री अकादमी द्वारा लोकनृत्य ज्ञान लोक साहित्य पुरस्कार भी शामिल है. विद्यानंद को वर्ष 2016 का गीत एवं नाटक अकादमी द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार जोगी देश के राष्ट्रपति द्वारा ही प्रदान किया गया था. इस पुरस्कार में उन्हें एक ताम्र पत्र व एक लाख की नकद राशि प्रदान की गई थी. अब विद्यानंद सरैक को पद्मश्री से राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया है, जिसके बाद न केवल जिला सिरमौर बल्कि हिमाचल का मान बढ़ा है. वहीं, पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हुए विख्यात लोक कलाकार विद्यानंद सरैक ने इसके लिए सरकार का आभार व्यक्त किया है.

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