शिमला। सूबे के निजी कॉलेजों में कई प्रिंसिपल नियमों को ताक पर रखकर नियुक्त हुए हैं। राज्य निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि अभी तक की जांच में आधे कॉलेजों के प्रिसिंपल सवालों के घेरे में हैं। कई प्रिंसिपल जहां न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं कर रहे हैं, वहीं कई की आयु अधिक है। दर्जनों प्रिंसिपलों की सर्विस प्रोफाइल संदेहास्पद है। कई कॉलेजों ने आयोग को अधूरा ब्योरा भी भेजा है। सौ निजी कॉलेजों ने अभी तक आयोग के पास प्रिंसिपलों का रिकॉर्ड भेजा है जिसमें 75 की जांच पूरी हुई है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो वीसी एनके शारदा की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने 75 कॉलेजों में से आधे कॉलेज प्रिंसिपल अयोग्य पाए हैं। अयोग्य प्रिंसिपलों की सूची सभी कॉलेजों की जांच पूरी करने के बाद सार्वजनिक की जाएगी। निजी डिग्री, तकनीकी, पालीटेक्निक, इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ, फार्मेेसी, नर्सिगिं और बीएड कॉलेजों के प्रिंसिपलों की जांच की गई है। कमेटी ने बताया कि यूजीसी के अनुसार प्रिंसिपल नियुक्त होने के लिए पीएचडी जरूरी है। 15 साल पढ़ाने का अनुभव चाहिए। स्नातकोत्तर में कम से कम 55 फीसदी अंक हों। 70 वर्ष से अधिक आयु नहीं होनी चाहिए।
नियामक आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल सेेवानिवृत्त अतुल कौशिक ने बताया कि छानबीन जारी है। अभी तक की जांच में कई अनियमितताएं पाई गई हैं।इसी के साथ ब्योरा नहीं देने वाले कॉलेजों को भेजा रिमाइंडर
रिकॉर्ड नहीं भेजने वाले कॉलेजों को आयोग ने रिमाइंडर भेजा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अगर सभी कॉलेजों ने जल्द जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई तो आयोग प्रिंसिपलों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
