ऐतिहासिक धरोहर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी का जीर्णोद्धार शुरू हो गया है। 1818 में बने इस भवन की पहली बार मरम्मत होगी। इसके जीर्णोद्धार पर 67 करोड़ रुपये खर्च होंगे। अंग्रेजों के शासन काल में वॉयस रीगल लॉज, उसके बाद राष्ट्रपति भवन और 1965 के बाद से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी के जीर्णोद्धार के कार्य की वीरवार को संस्थान के निदेशक प्रो. मकरंद आर परांजपे ने पूजा-अर्चना के साथ आधारशिला रखी। पहले चरण में करीब 12 करोड़ खर्च कर किचन विंग, पांच मंजिला भवन का कार्य कर इसे उसी रूप में लाया जाएगा। इसके लिए दो साल का समय रखा गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के मार्गदर्शन में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की देखरेख में यह कार्य होगा।
निदेशक परांजपे ने बताया कि चरणबद्ध तरीके से इस धरोहर को संवारा जाएगा। बताया कि 1818 के बाद से यह भवन अंग्रेजों की सत्ता का केंद्र रहा है। भारत की आजादी के संघर्ष से लेकर भारत-पाकिस्तान के विभाजन के शिमला समझौते का भी गवाह बना। दोनों देशों के बीच इस भवन में ही सीमा रेड क्लिफ लाइन नक्शे पर खींची गई थी। इस भवन को शिमला का पहला पक्का बताया जाता है। भारत-तिब्बत और चीन के बीच सर हैनरी मैकमोहन रेखा भी यहीं पर खींची गई थी। कहा कि यह संस्थान पोस्ट पीएचडी रिसर्च के लिए बना है। ऐतिहासिक राष्ट्रीय धरोहर को देखने के लिए हर साल दो लाख से अधिक पर्यटक आते हैं। इस बार कोरोना के कारण 18 मार्च से इसे बंद रखा गया है। अभी भी 18 स्कॉलर यहां अपना कार्य कर रहे हैं। कोरोना महामारी के कारण पर्सनल संपर्क वाली गतिविधियों पर जरूर असर पड़ा है, मगर वर्चुअल मोड से सभी कार्य किए जा रहे हैं। भवन के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू होने पर संस्थान के सचिव कर्नल डॉ. विजय कुमार तिवारी, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग शिमला के एसई देवेंद्र प्रकाश आदि मौजूद रहे।
पांच मंजिला भवन में हैं ऐतिहासिक महत्व की चीजें
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी के किचन विंग का पांच मंजिला ऐतिहासिक भवन जर्जर हो चुका है। इसमें अंग्रेजों के जमाने की बहुत सी चीजें हैं। मरम्मत और रेस्टोरेशन कार्य पूरा होने पर सामान का संग्रहालय बनाया जाना है। वाइस रीगल लॉज भवन होने के नाते इसमें हर सुविधा से लेस किचन होता था। हर मंजिल पर खाना पहुंचाने को बाकायदा लिफ्ट लगी थी। किचन लाउंड्री में उस समय 1800 लोग काम करते थे। भवन में रेफ्रिजरेशन प्लांट, लाउंड्री में उस समय के लगे गीजर, कपड़े सुखाने को स्टीम उसी से बनाई जाती थी। एक मंजिल में शराब बनाने का काम होता था। गलत काम करने पर सजा देने के लिए एक जेल भी बनी थी। इन सबके साक्ष्य आज भी यहां मौजूद हैं।
